नई दिल्ली: स्मार्टफोन का इस्तेमाल आज हर उम्र के लोग कर रहे हैं. हर उम्र से मतलब बच्चों से भी है. आजकल के बच्चे बिना फोन के अपनी जीवन सोच ही पा रहे हैं. चाहें पढ़ाई हो या एंटरटेनमेंट… हर काम फोन पर ही हो जाता है. हालांकि, अगर बच्चों का स्क्रीन टाइम कम नहीं किया गया तो यह आदत खतरनाक साबित हो सकती है. इसे लेकर एक नई स्टडी सामने आई है, जिसके बाद यह चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है.
इंसरम और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने बच्चों में स्क्रीन के इस्तेमाल और उनकी डेवलपमेंट को समझने के लिए एक रिचर्स की. इसमें सिंगापुर के GUSTO बर्थ कोहोर्ट में शामिल 502 बच्चों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया. इसमें अलग-अलग उम्र के बच्चों के स्क्रीन देखने के समय को रिकॉर्ड किया गया. इसमें 9 साल के बच्चों की पढ़ने-लिखने की क्षमता और करीब 10.5 साल की उम्र में वर्किंग मेमोरी को आंका गया.
इस स्टडी में केवल स्क्रीन टाइम ही नहीं देखा गया. बल्कि यह भी देखा गया कि किस उम्र से बच्चे स्क्रीन देखना शुरू कर देते हैं. स्टडी से पता चला कि करीब 1 साल की उम्र से अगर बच्चे स्क्रीन देखते हैं तो आगे चलकर उनकी पढ़ने-लिखने की क्षमता कम हो जाती है. सिर्फ इतना ही नहीं, उनकी याद रखने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है. इसी तरह करीब 6 साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर वाले बच्चों के रिजल्ट भी काफी खराब आए.
स्टडी के अनुसार, बच्चों का ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताना एक परेशानी का कारण बन सकता है. इससे उन्हें खेलने, किताबें पढ़ने, माता-पिता से बात करने और खुद से चीजें समझने में मुश्किल हो सकती है. इससे बच्चों के शरीर और दिमाग के विकास पर काफी ज्यादा असर पड़ता है. नॉर्मल एक्टिविटीज की जगह जब लंबे समय तक स्क्रीन ले लेती है तो डेवलपमेंट प्रभावित हो सकता है.
एक्सपर्ट्स की मानें तो छोटे बच्चों के स्क्रीन टाइम को लिमिट करना बेहद जरूरी है. खासतौर से 1-2 साल की उम्र में स्क्रीन से जितना बचाया जाए, उतना बेहतर रहता है. बच्चों को खेलने, बात करने और किताबों से जोड़ने पर ज्यादा ध्यान दें. संतुलित इस्तेमाल से बच्चों का विकास सही दिशा में हो सकता है.