नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इसे लेकर भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को सौंपने का प्लान बना रहा है. कोर्ट ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि ऑनलाइन फ्रॉड के मामले पूरे भारत में बढ़ते जा रहे हैं. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे क्राइम्स से संबंधित एफआईआर की डिटेल्स को भी शेयर करने को कहा है.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इन मामलों के बारे में हर राज्या और केंद्र शासित प्रदेश को नोटिस भेजा है. कोर्ट ने जब बुजुर्ग महिला के साथ हुए एक मामले के बारे में सुना तो उन्होंने मामले पर देखना शुरू किया. इस मामले में सरकारी अधिकारी बनकर क्रिमिनल्स ने ऑनलाइन पैसे ठगे थे.
CBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि इनमें से कई साइबर क्राइम म्यांमार और थाईलैंड जैसे दूसरे देशों से ऑपरेट किए जा रहे हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBI को इन मामलों की ठीक से जांच करने के लिए एक डिटेल्ड प्लान भी रेडी करने के लिए कहा. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि वह इस बात पर कड़ी नजर रखेगा कि CBI जांच को कैसे हैंडल करती है. साथ ही अगर जरूरत पड़ी तो आगे के लिए निर्देश भी देगा.
बता दें कि 17 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन स्कैम जिसमें ज्यादा डिजिटल अरेस्ट के मामले थे, के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई थी. इस तरह के स्कैम में स्कैमर पुलिस या कोर्ट अधिकारी बनकर लोगों को जराते हैं और नकली ऑर्डर भी दिखाते हैं. जजों ने कहा कि ये क्राइम कानूनी सिस्टम में लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं.
कोर्ट ने हरियाणा के अंबाला में एक और मामले के बारे में बताया. यहां पर एक सीनियर सिटीजन कपल को फेक कोर्ट डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल करके क्रिमिनल्स ने धोखा दिया. इस क्राइम के तहत 1.05 करोड़ रुपये जबरन वसूल लिए गए. जजों ने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है जिसे कोई लोकल पुलिस स्टेशन हैंडल कर सके. ऐसे स्कैम के पीछे क्रिमिल्स के बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के मिलकर काम करने की जरूरत है.