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टेक प्रोफेशनल का कमाल, ChatGPT की मदद से बनाया कैंसर का टीका, अपने कुत्ते को दी नई जिंदगी

इलाज के लिए पॉल ने सबसे पहले कुत्ते के ट्यूमर का सैंपल लिया और उसकी DNA सीक्वेंसिंग करवाई. इसके लिए उन्होंने एक जीनोमिक रिसर्च सेंटर की मदद ली.

Anuj
Edited By: Anuj
टेक प्रोफेशनल का कमाल, ChatGPT की मदद से बनाया कैंसर का टीका, अपने कुत्ते को दी नई जिंदगी
Courtesy: Chat GPT

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल साइंस में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऑस्ट्रेलिया के एक टेक एक्सपर्ट ने AI टूल्स की मदद से अपने पालतू कुत्ते के कैंसर के इलाज का तरीका खोजने का दावा किया है. बताया जा रहा है कि इस प्रयोग के बाद कुत्ते के ट्यूमर का आकार करीब आधा हो गया. यह मामला सोशल मीडिया पर काफी से चर्चा में है.

ऑस्ट्रेलिया के टेक प्रोफेशनल पॉल कनिंगहम का डॉग 'रोज' कैंसर से पीड़ित था. डॉक्टरों ने बताया कि उसके पास ज्यादा समय नहीं बचा है. इसके बाद पॉल ने हार मानने के बजाय AI टूल्स की मदद लेने का फैसला किया. उन्होंने AI से ऐसा प्लान तैयार कराया जिसमें कुत्ते के लिए पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन बनाने की संभावना बताई गई. इसके बाद उन्होंने मेडिकल रिसर्च और जीन से जुड़ी जानकारी जुटाकर इस पर काम शुरू किया.

ट्यूमर का सैंपल लिया

इलाज के लिए पॉल ने सबसे पहले कुत्ते के ट्यूमर का सैंपल लिया और उसकी DNA सीक्वेंसिंग करवाई. इसके लिए उन्होंने एक जीनोमिक रिसर्च सेंटर की मदद ली. DNA से मिले डेटा को कई कंप्यूटर एल्गोरिद्म और डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम से जांचा गया. इस जांच से उन जीन म्यूटेशन की पहचान हुई, जो कैंसर के लिए जिम्मेदार थे. इन्हीं जानकारियों के आधार पर एक पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन का डिजाइन तैयार किया गया.

100 पेज का दस्तावेज

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल क्रिसमस के आसपास यह वैक्सीन कुत्ते को दी गई. कुछ समय बाद जांच में पाया गया कि ट्यूमर का आकार लगभग आधा रह गया. हालांकि, पॉल के अनुसार वैक्सीन तैयार करने से ज्यादा मुश्किल काम इसके लिए कानूनी और एथिक्स से जुड़ी मंजूरी लेना था. इसके लिए उन्हें करीब तीन महीने तक रोज मेहनत करनी पड़ी और लगभग 100 पेज का दस्तावेज तैयार करना पड़ा.

टेक जगत में चर्चा

इस घटना के सामने आने के बाद टेक जगत में भी इस पर चर्चा शुरू हो गई है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI की मदद से मेडिकल रिसर्च और इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं. खासतौर पर पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के क्षेत्र में यह तकनीक बड़ी भूमिका निभा सकती है.