अब एसी की जरूरत नहीं! गर्मी को हराने वाले सेल्फ-कूलिंग कपड़े, जानें इस तकनीक के बारे में
जरा सोचिए, अगर गर्मियों में एक ऐसा कपड़ा मिल जाए, जो शरीर को ठंडा रखे, तो क्या हो? लोग ऐसा कपड़ा जरूर खरीदना चाहेंगे. एक ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम किया जा रहा है, जो इस तरह का कपड़ा बनाने में सक्षम हो सकती है.
नई दिल्ली: गर्मियां करीब-करीब आ ही चुकीं हैं. इस मौसम को चरम पर पहुंचने में समय नहीं लगेगा. ऐसे में आपने अपने गर्मियों के कपड़े भी निकाल लिए होंगे. हालांकि, कितना भी आरामदायक कपड़ा क्यों न पहन लो, गर्मी कहीं न कहीं से अपना रास्ता बना ही लेती है. ऐसे में जरा सोचिए, अगर एक ऐसा कपड़ा हो, जो पहनकर आपको गर्मी लगे ही न, तो? हम मजाक नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसा हो सकता है. हां, अभी तक ऐसा हुआ नहीं है, लेकिन इस पर काम जरूर चल रहा है.
यूनाइटेड स्टेट्स के साइंटिस्ट्स ने ऐसे कपड़े बनाने का एक स्मार्ट तरीका बनाया है जो आपको गर्मी के मौसम में ठंडा रखेंगे. यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा एट बर्मिंघम (UAB) के रिसर्चर्स ने डॉ. विनॉय थॉमसकी लीडरशिप में यह नई टेक्नोलॉजी डेवलप की है. बता दें कि ये डॉक्टर भारत के केरल के कोट्टाराक्कारा के वलकम से हैं. इस टेक्नोलॉजी के पेटेंट के लिए भी अप्लाई किया गया है. उनका काम अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के एक जर्नल में पब्लिश हुआ है.
बताया जा रहा है कि ये टीम पूरी तरह से नया कपड़ा नहीं बना रही है, बल्कि उन्होंने नॉर्मल, रोजाना इस्तेमाल होने वाले कपड़ों और टेक्सटाइल को हीट-रेगुलेटिंग कपड़ों में बदलाव का एक तरीका खोजा है. टीम दो मेन टेक्नीक इस्तेमाल कर रही है, जिसमें इलेक्ट्रोस्पिनिंग और प्लाज्मा सरफेस मॉडिफिकेशन शामिली हैं.
क्या हैं ये टेक्नीक:
इलेक्ट्रोस्पिनिंग- यह कपड़े पर छोटे बोरॉन नाइट्राइड नैनोपार्टिकल्स को बराबर फैलाता है. बोरॉन नाइट्राइड गर्मी को संभालने और दूर करने में मदद करता है.
प्लाज्मा सरफेस मॉडिफिकेशन- लो-टेम्परेचर प्लाज्मा (LTP) का इस्तेमाल करके, सिलाई के धागों या कपड़े की सरफेस में सिलिकॉन ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स मिलाते हैं. ये नैनोपार्टिकल्स कपड़े पर एक एक्स्ट्रा प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम करते हैं. वो आपके शरीर से गर्मी को दूर खींचने में मदद करते हैं और कपड़े के गर्माहट महसूस होने को कम करते हैं.
इस तकनीक को किया गया टेस्ट:
इस टेस्ट में, ट्रीट किए गए कपड़ों ने बाहर का टेम्परेचर 35°C से लगभग 20°C तक कम कर दिया. यह सीधे-सीधे 15 डिग्री की गिरावट है. इससे कपड़ा ठंडा रहता है. यह कोटिंग 5 से 8 धुलाई के बाद भी अच्छी तरह काम करती है. इससे कपड़े के दिखने या बाकी किसी भी तरीके में कोई बदलाव नहीं आता है. अगर इन कपड़ों को कई बार धोया जाए, तो कूलिंग इफेक्ट धीरे-धीरे कम हो जाता है, इसलिए रिसर्चर ज्यादा समय तक चलने वाले रिजल्ट के लिए डबल-लेयर कोटिंग इस्तेमाल करने का भी सुझाव दे रहे हैं.
किस तरह के कपड़ों पर किया जाएगा इस टेक्नीक का इस्तेमाल?
यह तरीका पुराने तरीकों से बेहतर और सस्ता है, जिनसे आमतौर पर एकदम नए खास मटीरियल बनते थे. नई टेक्नीक का इस्तेमाल लगभग किसी भी तरह के कपड़े, जैसे कॉटन, पॉलिएस्टर, या दूसरे कपड़ों पर किया जा सकता है, जिससे इसे असली कपड़ों में लगाना आसान हो जाता है. पेटेंट अप्रूव होने के बाद, कंपनियां इन कूलिंग कपड़ों को बेचने के लिए बनाना शुरू कर सकती हैं. यह गर्म जगहों पर, बाहर काम करने वाले लोगों, एथलीट्स, या ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत मददगार हो सकता है जो बिना एयर कंडीशनिंग के आरामदायक महसूस करना चाहता है.ॉ