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India Daily

Bharat Taxi ऐप हुई लॉन्च, अब ड्राइवर्स को नहीं देना होगा कमिशन; यात्री को भी देना होगा कम किराया

ओला-उबर को टक्कर देने के लिए भारत टैक्सी सर्विस लॉन्च की गई है. यह सरकार सपोर्टेड जीरो-कमीशन कैब सर्विस है.

Shilpa Shrivastava
Bharat Taxi ऐप हुई लॉन्च, अब ड्राइवर्स को नहीं देना होगा कमिशन; यात्री को भी देना होगा कम किराया
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत के कैब-हेलिंग मार्केट में एक नई सर्विस ने दस्तक दे दी है. आज से, भारत टैक्सी सर्विस ने आधिकारिक तौर पर अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया है. यह सर्विस ओला-उबर को कड़ी टक्कर देगी. यह ऐप ऐसे समय में लॉन्च की गई है, जब यात्री और ड्राइवर दोनों ही ज्यादा कीमतों और कम कमाई से नाखुश हैं. 

बता दें कि यह भारत की पहली सरकार सपोर्टेड जीरो-कमीशन कैब सर्विस है. इसका मतलब है कि ड्राइवरों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कंपनी को नहीं देना पड़ेगा. भारत टैक्सी एक कोऑपरेटिव मॉडल पर काम करती है. इसमें ड्राइवर ही मालिक होते हैं. यह सर्विस सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा चलाई जाती है. इसका उद्देश्य ड्राइवरों के लिए सही इनकम और यात्रियों के लिए कम कीमत है. 

एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध:

भारत टैक्सी ने एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध है. इस ऐप के जरिए राइडर्स कैब आसानी से बुक कर सकते हैं. कुल किराया पहले से देख सकते हैं जिससे अचानक कीमतों में बदलाव से बचा जा सकता है. 

यात्रियों को इसमें सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह एक फिक्स्ड प्राइसिंग सिस्टम पर काम करेगा. भारत टैक्सी में किसी भी तरह का सर्ज प्राइसिंग सिस्टम नहीं है. इसका मतलब है कि पीक आवर्स, खराब मौसम या ज्यादा डिमांड के दौरान किराया बढ़ने की दिक्कत नहीं आएगी. बता दें कि कीमतें पहले 4 किलोमीटर के लिए 30 रुपये से शुरू होती है. वहीं, 4 से 12 किलोमीटर के बीच की दूरी के लिए किराया 23 रुपये प्रति किलोमीटर है. जैसे ही यात्रा लंबी हो जाती है, यह किराया घटकर 12 रुपये प्रति किलोमीटर हो जाता है. 

कई तरह की कैब हैं उपलब्ध: 

यह ऐप अलग-अलग तरह की कैब ऑफर करता है. इसमें नॉन-एसी, एसी, प्रीमियम और XL गाड़ियां शामिल हैं. पिकअप का समय भी ज्यादा नहीं होगा. यह उन लोगों के लिए सही रहेगा, जिन्हें हर रोज ट्रांसपोर्ट की जरूरत पड़ती है. बता दें कि भारत टैक्सी के ड्राइवर वेरिफाइड हैं. यह दिल्ली पुलिस सिस्टम और अन्य सरकारी एजेंसियों से जुड़ी हुई है. इससे यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की सुरक्षा बेहतर होती है.