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India Daily

'AI को लेकर मैं गलत था...', लाखों लोगों की नौकरियां जानें के बाद टेक दिग्गजों को क्यों हो रहा पछतावा? जानें

AI को लेकर किए गए बड़े दावों के बीच कई कंपनियों ने छंटनी की थी, लेकिन अब उद्योग जगत के कुछ प्रमुख लोग मान रहे हैं कि AI पूरी तरह इंसानों का विकल्प नहीं बन पाया है. चलिए जानते हैं क्या आ रहीं दिक्कतें.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'AI को लेकर मैं गलत था...', लाखों लोगों की नौकरियां जानें के बाद टेक दिग्गजों को क्यों हो रहा पछतावा? जानें
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में बड़ी उम्मीदें और आशंकाएं पैदा हुईं. कई टेक कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों ने दावा किया था कि AI आने वाले समय में लाखों नौकरियों की जगह ले सकता है. इसी सोच के बीच कई बड़ी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी भी की. हालांकि अब AI को लेकर कई प्रमुख उद्योग नेताओं के सुर बदलते दिखाई दे रहे हैं.

OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर AI के प्रभाव को लेकर जो अनुमान लगाए थे, वे पूरी तरह सही साबित नहीं हुए. उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि अब तक कई प्रकार की कार्यालयी नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, लेकिन वास्तविकता उससे अलग रही है.

पिछले दो वर्षों में कितना हुआ है बदलाव?

पिछले दो वर्षों में मेटा, अमेजन, गूगल और अन्य बड़ी कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की. कई मामलों में कंपनियों ने इसे तकनीकी बदलाव और AI आधारित कार्यप्रणाली से जोड़ा. इससे कर्मचारियों के बीच यह डर बढ़ा कि AI भविष्य में रोजगार के अवसरों को कम कर सकता है.

हालांकि अब कंपनियों को AI को बड़े स्तर पर लागू करने की वास्तविक लागत का भी सामना करना पड़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार बड़े AI मॉडल को संचालित करने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता, महंगे ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU), विशाल डेटा सेंटर और लगातार बिजली की आवश्यकता होती है. इन सभी संसाधनों पर होने वाला खर्च कई बार अपेक्षा से अधिक साबित हो रहा है.

NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग ने क्या बताया?

इस बीच दुनिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि AI को नौकरी कटौती का कारण बताना उचित नहीं है. उनके अनुसार AI नई संभावनाएं और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना होना चाहिए, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या कम करना.

AI की एक बड़ी चुनौती इसकी सटीकता भी है. कई बार AI सिस्टम गलत या काल्पनिक जानकारी प्रस्तुत कर देते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में हैलुसिनेशन कहा जाता है. यही कारण है कि कानूनी, वित्तीय, स्वास्थ्य और व्यावसायिक क्षेत्रों में AI के आउटपुट की जांच के लिए अभी भी अनुभवी मानव विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है.

विशेषज्ञों का क्या है मानना?

विशेषज्ञों का मानना है कि AI निश्चित रूप से कार्य करने के तरीके को बदल रहा है, लेकिन यह पूरी तरह इंसानों का विकल्प नहीं बन पाया है. वर्तमान परिस्थितियां संकेत देती हैं कि भविष्य में AI और इंसान साथ मिलकर काम करेंगे, जहां तकनीक उत्पादकता बढ़ाएगी और मानव अनुभव, निर्णय क्षमता तथा रचनात्मकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे.