Uttarkashi Cloudburst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली-हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद चल रहे राहत और बचाव कार्यों में सेना, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां पूरी ताकत से जुटी हुई हैं. इस आपदा ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. ब्रिगेडियर एम.एस. ढिल्लन ने इस अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
लगातार जारी है बचाव अभियान
ब्रिगेडियर ढिल्लन ने बताया, "5 अगस्त से सेना, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां निरंतर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं. आज हमारा पूरा ध्यान उन लोगों को खोजने पर है, जो बादल फटने के बाद मलबे में दब गए हैं." उन्होंने कहा कि इस अभियान में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके. धराली आपदाग्रस्त क्षेत्रों से प्रभावित लोगों को निकालने और वहां जरूरी राहत सामग्री भेजने का कार्य निरंतर चल रहा है.
धराली आपदाग्रस्त क्षेत्रों से प्रभावित लोगों को निकालने और वहां जरूरी राहत सामग्री भेजने का कार्य निरंतर चल रहा है।#Dharali #Uttarkashi #Uttarakhand #UttarkashiCloudburst #ReliefMaterial pic.twitter.com/MRSubtioST
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) August 10, 2025
आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र में राहत व बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जीवनोपयोगी जरूरी समान की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।#UttarkashiCloudBrust#DisasterRelief#ReliefMaterial… pic.twitter.com/QgpSK0Zqd5
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ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग
ब्रिगेडियर ने आगे कहा कि बचाव कार्य को और प्रभावी बनाने के लिए सेना ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का इस्तेमाल कर रही है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग कर रहे हैं, जो जमीन के नीचे दबे हुए मानव या धातु की वस्तुओं की पहचान करता है."
#WATCH | Uttarkashi, Uttarakhand: On the ongoing search operation in the Dharali-Harsil area following a cloudburst, Brigadier M S Dhillon says, "Since the 5th August, the army, state government, and other agencies have been continuously working on rescue and relief operations.… pic.twitter.com/sk4TqvMetb
— ANI (@ANI) August 10, 2025
यह तकनीक मलबे में फंसे लोगों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिससे बचाव कार्य में तेजी आई है. उन्होंने बताया कि संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेना ने क्षेत्र में सैटेलाइट संचार की व्यवस्था भी की है. ब्रिगेडियर ढिल्लन ने बताया, "हमने सैटेलाइट संचार स्थापित किया है ताकि राहत कार्यों में समन्वय बना रहे."