देहरादून: चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड परिवहन विभाग ने इस बार बड़े बदलाव किए हैं. 23 मार्च से व्यावसायिक वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड बनना शुरू हो जाएगा. यह कदम खासतौर पर दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है. विभाग ने साफ किया है कि इस बार वाहनों की फिटनेस जांच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी.
नए नियमों के अनुसार बाहरी राज्यों से आने वाले 12 सीट से अधिक क्षमता वाले वाहनों को केवल 15 दिन के लिए ही ग्रीन कार्ड मिलेगा. वहीं उत्तराखंड के स्थानीय वाहनों को पहले की तरह छह महीने की वैधता दी जाएगी. इससे बाहरी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी.
23 मार्च को ऋषिकेश में पूजा-अर्चना के साथ ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी. शुरुआत में उत्तराखंड के वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी. इस साल 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी.
ग्रीन कार्ड का मुख्य उद्देश्य सभी वाहनों का पूरा रिकॉर्ड परिवहन विभाग के पास रखना है. इसके लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के साथ आरसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण प्रमाण पत्र और टैक्स से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य होगा.
इसके अलावा चालक के पास हिल इंडोर्स लाइसेंस होना जरूरी है यानी उसे पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए. वाहन की तकनीकी और भौतिक जांच के बाद ही ग्रीन कार्ड जारी किया जाएगा. इसके बाद हर यात्रा के लिए ट्रिप कार्ड लेना भी जरूरी होगा.
ट्रिप कार्ड में चालक और यात्रियों की पूरी जानकारी दर्ज होगी. इससे किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की पहचान और जानकारी तुरंत मिल सकेगी.
इस बार एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि केवल श्रद्धालुओं के वाहन ही नहीं बल्कि पर्यटक वाहनों को भी ग्रीन कार्ड बनवाना होगा. ट्रेकिंग और एडवेंचर पर्यटन के लिए आने वाले पर्यटकों के वाहनों पर भी यह नियम लागू होगा. इन वाहनों को भी 15 दिन की वैधता वाला ग्रीन कार्ड मिलेगा.
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी व्यावसायिक वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा. चेकपोस्ट पर मेडिकल टीम तैनात रहेगी और चालकों की आंखों की जांच भी होगी. परिवहन विभाग का कहना है कि इन सख्त नियमों से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी.