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देहरादून जू की 'एडॉप्ट एन एनिमल' योजना को मिल रहा भरपूर समर्थन, 148 लोग बन चुके हैं वन्यजीवों के संरक्षक

देहरादून जू की 'एडॉप्ट एन एनिमल' योजना लोगों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रही है. वर्ष 2016-17 से जून 2026 तक 148 लोग, परिवार, संस्थाएं और कंपनियां विभिन्न वन्यजीवों को गोद लेकर उनके संरक्षण में आर्थिक सहयोग दे चुके हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
देहरादून जू की 'एडॉप्ट एन एनिमल' योजना को मिल रहा भरपूर समर्थन, 148 लोग बन चुके हैं वन्यजीवों के संरक्षक
Courtesy: AI

उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण अब केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रह गया है. देहरादून में बड़ी संख्या में लोग स्वयं आगे बढ़कर जू में रह रहे पशु-पक्षियों की देखभाल और संरक्षण में भागीदारी निभा रहे हैं. कोई बाघ का संरक्षक बन रहा है तो कोई तेंदुए, कछुए, गिद्ध या पक्षियों के संरक्षण के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहा है.

इसी जनसहभागिता का परिणाम है कि देहरादून जू की 'एडॉप्ट एन एनिमल' योजना लगातार लोकप्रिय होती जा रही है. जू प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 से 30 जून 2026 तक कुल 148 लोग, परिवार, संस्थान और कंपनियां विभिन्न वन्यजीवों को गोद लेकर उनके संरक्षण में सहयोग कर चुके हैं.

डेढ़ साल में तेजी से बढ़ी लोगों की रुचि

पिछले डेढ़ वर्ष में इस योजना के प्रति लोगों का रुझान पहले की तुलना में काफी बढ़ा है. अप्रैल 2025 से जून 2026 के बीच कुल 49 वन्यजीवों का एडॉप्शन हुआ, जिससे जू प्रबंधन को 8.29 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ. जू प्रशासन के अनुसार यह राशि पशु-पक्षियों के भोजन, चिकित्सा, रखरखाव और अन्य संरक्षण संबंधी कार्यों पर खर्च की जाती है.

वर्ष 2025 में अप्रैल से दिसंबर के बीच 21 एडॉप्शन दर्ज किए गए, जिनसे 3.44 लाख रुपये का योगदान मिला. जनवरी 2026 से 30 जून 2026 के बीच मात्र छह महीनों में 28 नए एडॉप्शन दर्ज किए गए. इस अवधि में जू को 4.85 लाख रुपये की सहायता प्राप्त हुई. यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है. इस दौरान बाघ, तेंदुआ, हिमालयन ब्लैक बियर, गिद्ध, तोता, चित्तीदार हिरण और कछुए को सबसे अधिक गोद लिया गया.

गोद लेने का मतलब घर ले जाना नहीं

जू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 'एडॉप्ट एन एनिमल' योजना के तहत किसी जानवर को गोद लेने का अर्थ उसे अपने घर ले जाना नहीं है. इस योजना में दानदाता संबंधित पशु या पक्षी के भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, रखरखाव और संरक्षण के लिए आर्थिक सहयोग देता है, जबकि वन्यजीव जू में ही रहता है. इस पहल के माध्यम से आम नागरिक भी वन्यजीव संरक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं और उनके संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं