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India Daily

क्या सस्ता होने वाला है पेट्रोल-डीजल? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में हालिया नरमी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है. केंद्र सरकार का कहना है कि आने वाले कुछ सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर आगे का फैसला निर्भर करेगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
क्या सस्ता होने वाला है पेट्रोल-डीजल? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद देशभर में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पेट्रोल और डीजल सस्ते होंगे. इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो ईंधन कीमतों में कटौती को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक होगा. फिलहाल तेल कंपनियां पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं.

फिलहाल तत्काल राहत की उम्मीद कम

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया कमी के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत घटने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में स्थिरता बनी रहती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. सरकार का मानना है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार की स्थिति को कुछ समय तक परखा जाना जरूरी है. मंत्री ने यह भी कहा कि यदि अगले कुछ सप्ताह तक वैश्विक कीमतें कम बनी रहती हैं, तो ईंधन दरों में कमी को लेकर चर्चा होना पूरी तरह उचित होगा.

महंगे तेल की खरीद का असर अभी जारी

सरकार के अनुसार तेल विपणन कंपनियां इस समय उस कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं, जिसे कुछ महीने पहले ऊंचे दामों पर खरीदा गया था. आमतौर पर कंपनियां अपनी जरूरत का कच्चा तेल लगभग दो महीने पहले खरीदती हैं. ऐसे में वर्तमान में उपयोग किया जा रहा अधिकांश तेल अप्रैल और मई के दौरान खरीदा गया था, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई थीं. इसी वजह से वैश्विक बाजार में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है.

ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर सरकार का जोर

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि तेल कीमतों में नरमी के इस दौर का उपयोग भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि देश को तेल और ईंधन भंडारण क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम करना चाहिए. मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत के पास बंदरगाहों, रिफाइनरियों, टर्मिनलों और रणनीतिक भंडारों में इतना तेल मौजूद है, जिससे लगभग 76 से 80 दिनों की जरूरत पूरी की जा सकती है. हालांकि उनका मानना है कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए यह क्षमता और बढ़ाई जानी चाहिए.

सरकार ने गिनाए पुराने फैसले और उपलब्धियां

मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में कई बार पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाया है. इसके चलते सरकार ने प्रति लीटर करीब 10 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ स्वयं वहन किया. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक संकटों के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में वृद्धि सीमित रही है. उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की तुलना में भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार का कहना है कि वह उपभोक्ताओं और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है.