अल्मोड़ा के इस मंदिर में छुपा चमत्कार, स्याही देवी की मूर्ति का दिन में तीन बार बदलता है रंग; ये है रहस्य
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित स्याही देवी मंदिर को बेहद चमत्कारी माना जाता है. मान्यता है कि यहां मां दुर्गा की मूर्ति का रंग दिन में तीन बार बदलता है. नवरात्रि के समय यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
अल्मोड़ा: उत्तराखंड का अल्मोड़ा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. यहां पहाड़ों के बीच कई ऐसे मंदिर हैं जिनसे जुड़ी कहानियां लोगों की आस्था को और मजबूत करती हैं. इन्हीं में से एक स्याही देवी मंदिर भी है. यह मंदिर शीतलाखेत के पास ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है और लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. चैत्र नवरात्रि आने वाली है. यह 19 मार्च से शुरू होगी. इस दौरान पूरे देश में मां दुर्गा के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है. ऐसे समय में स्याही देवी मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है. नवरात्रि के दिनों में यहां दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल देखने को मिलता है.
स्थानीय परंपराओं के अनुसार स्याही देवी मंदिर का निर्माण कत्युरी राजाओं के समय में हुआ था. इसकी उम्र करीब 900 से 1700 साल के बीच मानी जाती है. इस मंदिर से जुड़ी एक दिलचस्प लोककथा भी सुनने को मिलती है. कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण एक ही रात में पूरा हो गया था. कहानी के मुताबिक गांव के लोगों ने मंदिर के लिए ईंटें तैयार की थीं. उसी रात इलाके में तेज बारिश हुई थी. लेकिन जब अगली सुबह लोग उस जगह पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सारी ईंटें पूरी तरह पक चुकी थीं और मंदिर का ढांचा तैयार हो चुका था. स्थानीय लोग इसे आज भी माता की कृपा से जुड़ा चमत्कार मानते हैं.
बेल और गुड़ के मिश्रण से जोड़ी गई हैं ईंटें:
इस मंदिर की बनावट भी लोगों को हैरान करती है. मान्यता है कि इसके निर्माण में न तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ और न ही चूने का. मंदिर की ईंटों को जोड़ने के लिए बेल और गुड़ से तैयार किए गए खास मिश्रण का उपयोग किया गया था. प्राचीन समय में इस तरह की पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल कई धार्मिक इमारतों में किया जाता था. स्याही देवी मंदिर में भी यही तरीका अपनाया गया था. यही कारण है कि इतने लंबे समय के बाद भी मंदिर मजबूती से खड़ा है और इसकी संरचना आज भी सुरक्षित दिखाई देती है.
मूर्ति का रंग दिन में बदलता है तीन बार:
इस मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात यहां स्थापित माता की मूर्ति से जुड़ी बताई जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां माता की मूर्ति का रंग दिन में तीन अलग अलग समय पर बदलता दिखाई देता है. सुबह, दोपहर और शाम के समय मूर्ति का रंग थोड़ा अलग नजर आता है. श्रद्धालु इसे माता की दिव्य शक्ति और उनकी जीवंत उपस्थिति का संकेत मानते हैं. यही विश्वास और रहस्य इस मंदिर को और भी खास बनाते हैं.
आसपास के लगभग 52 गांवों की इष्ट देवी स्याही देवी को माना जाता है. उत्तराखंड में कई घरों में इन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अगर सच्चे मन से माता से प्रार्थना की जाए तो मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि दूर दूर से लोग यहां आकर दर्शन करते हैं. नवरात्रि के समय मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त यहां जुटते हैं.
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