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देहरादून में प्रमुख सचिव और डीएम का मानसून से पहले बड़ा एक्शन, जलभराव और भूस्खलन रोकने के दिए निर्देश

देहरादून में मानसून से पहले प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. प्रमुख सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने तैयारियों की समीक्षा कर जलभराव, भूस्खलन और आपदा प्रबंधन पर अहम निर्देश दिए.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
देहरादून में प्रमुख सचिव और डीएम का मानसून से पहले बड़ा एक्शन, जलभराव और भूस्खलन रोकने के दिए निर्देश
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मानसून की शुरुआत से पहले देहरादून में प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. शासन और जिला प्रशासन ने संभावित आपदाओं से निपटने के लिए व्यापक योजना बनाई है. समीक्षा बैठक और संवेदनशील क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए.

मानसून से पहले तैयारियों की बड़ी समीक्षा

प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने जिला कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मानसून को लेकर विभागों की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया. बैठक में जलभराव वाले इलाकों, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, भूस्खलन संभावित स्थानों और राहत व्यवस्थाओं की स्थिति पर चर्चा हुई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी लंबित कार्य पूरे किए जाएं. सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में सुरक्षा कार्य और अन्य बाढ़ सुरक्षा योजनाओं की प्रगति भी जांची गई. इसके बाद प्रमुख सचिव ने कार्लीगाड़ और माझाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण किया.

जलभराव और भूस्खलन रोकने पर खास फोकस

देहरादून में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 39 डी-वाटरिंग पंप तैयार रखे गए हैं. प्रशासन ने शहर के प्रमुख नालों की सफाई का काम तेज कर दिया है और 169 में से 153 नालों की सफाई पूरी होने की जानकारी दी गई. आईएसबीटी क्षेत्र की पुरानी जलनिकासी समस्या के समाधान के लिए संयुक्त टीम बनाई गई है. वहीं, 12 भूस्खलन संवेदनशील जोन की पहचान कर दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. क्लाउड बर्स्ट की आशंका वाले क्षेत्रों में निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके.

स्वास्थ्य, शिक्षा और राहत व्यवस्था पर भी नजर

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया. नियमित फॉगिंग और जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया गया. प्रशासन ने 89 ऐसे स्कूल चिह्नित किए हैं जहां बारिश के दौरान आवागमन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा 73 गांवों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है. गर्भवती महिलाओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है. प्रमुख सचिव ने सभी राहत शिविरों, नियंत्रण कक्षों और आपदा प्रबंधन संसाधनों को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.