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IFS संजीव चतुर्वेदी जाएंगे दिल्ली, लोकपाल में संयुक्त सचिव पद के लिए धामी सरकार ने दी NOC

उत्तराखंड सरकार ने वरिष्ठ वन अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भारत के लोकपाल में संयुक्त सचिव स्तर के पद के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है.  इससे उनकी उम्मीदवारी को आधिकारिक समर्थन मिल गया है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
IFS संजीव चतुर्वेदी जाएंगे दिल्ली, लोकपाल में संयुक्त सचिव पद के लिए धामी सरकार ने दी NOC
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उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी, हल्द्वानी के निदेशक और मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी को भारत के लोकपाल में संयुक्त सचिव स्तर के पद के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति दे दी है. सरकार की ओर से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के बाद अब उनकी दावेदारी को औपचारिक समर्थन मिल गया है.

राज्य सरकार ने जारी किया अनापत्ति प्रमाण पत्र

राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, संजीव चतुर्वेदी को भारत के लोकपाल में संयुक्त सचिव स्तर के पद के लिए आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है. यह अनापत्ति प्रमाण पत्र उत्तराखंड के अतिरिक्त सचिव हिमांशु खुराना द्वारा 13 जून को जारी किया गया. सरकार ने स्पष्ट किया कि लोकपाल संस्था द्वारा विज्ञापित इस महत्वपूर्ण पद के लिए चतुर्वेदी की उम्मीदवारी पर राज्य की ओर से कोई आपत्ति नहीं है.

लोकपाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना

भारत का लोकपाल देश में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी और शिकायतों के निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था मानी जाती है. ऐसे में संयुक्त सचिव स्तर का पद प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम होता है. संजीव चतुर्वेदी लंबे समय से वन और प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत हैं और विभिन्न जिम्मेदार पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उनका चयन होता है तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलेगा. इससे उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों की पहचान भी राष्ट्रीय मंच पर और मजबूत होगी.

हल्द्वानी से दिल्ली तक का प्रशासनिक सफर

वर्तमान में संजीव चतुर्वेदी हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी में निदेशक और मुख्य वन संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में कई प्रशासनिक और प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब उनकी उम्मीदवारी केंद्रीय स्तर पर आगे बढ़ेगी. प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि ऐसे पदों पर अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति से संस्थागत कामकाज को मजबूती मिलती है.