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पतंजलि के घी के मिलावटी होने पर कंपनी ने दी सफाई, सैंपल फेल होने पर लैब पर ही उठाए सवाल

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिए गए पतंजलि गाय के घी के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरने पर कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की. अब इस मामले को लेकर कंपनी ने अपनी सफाई दी है.

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Edited By: Princy Sharma
पतंजलि के घी के मिलावटी होने पर कंपनी ने दी सफाई, सैंपल फेल होने पर लैब पर ही उठाए सवाल
Courtesy: Pinterest

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में करीब पांच साल पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जब खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए पतंजलि गाय के घी के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और न्यायालय ने कड़े शब्दों में अपना फैसला सुनाया. प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की दो अलग-अलग प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षणों के बाद यह घी अस्वीकार्य"पाया गया.

इसी आधार पर अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड समेत डिस्ट्रीब्यूटर और स्थानीय विक्रेता पर आर्थिक दंड लगाते हुए चेतावनी जारी की कि वे खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें. कोर्ट के आदेश के अनुसार पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर 1 लाख रुपये, ब्रह्म एजेंसी पर 25 हजार रुपये और करन जनरल स्टोर पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है.

कंपनी ने दी सफाई

लेकिन इस फैसले के बाद पतंजलि की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. कंपनी का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के जरिए उन्हें इस फैसले की जानकारी मिली और यह निर्णय 'त्रुटिपूर्ण तथा विधि-विरुद्ध' है. पतंजलि का दावा है कि जिन आधारों पर घी को मानकों से कम बताया गया, वे न केवल गलत थे बल्कि प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई.

कंपनी ने लगाया गंभीर आरोप

कंपनी ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि जिस रेफरल लैब में नमूने की जांच की गई, वह NABL से गाय के घी के परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त ही नहीं थी. पतंजलि के अनुसार, ऐसी लैब द्वारा किया गया परीक्षण स्वीकार्य नहीं होना चाहिए. कंपनी ने इसे 'हास्यास्पद और घोर आपत्तिजनक' बताते हुए कहा कि एक 'सब-स्टैंडर्ड लैब' ने उनके 'सर्वश्रेष्ठ गाय के घी' को गलत तरीके से सब-स्टैंडर्ड घोषित कर दिया.

दूसरा बड़ा तर्क यह दिया गया कि जिन पैरामीटरों के आधार पर नमूना असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे, इसलिए कानूनी रूप से उनका इस्तेमाल किया जाना गलत है. तीसरी आपत्ति यह कि पुनः परीक्षण नमूने की एक्सपायरी तिथि बीत जाने के बाद किया गया, जबकि नियमों के अनुसार समाप्त हो चुके नमूनों का परीक्षण मान्य नहीं होता.

कंपनी आदेश के खिलाफ करेगी अपील दायर

पतंजलि का कहना है कि कोर्ट ने इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया और एकपक्षीय निर्णय सुना दिया. कंपनी अब इस आदेश के खिलाफ फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर कर रही है और उन्हें विश्वास है कि सत्य के आधार पर फैसला उनके पक्ष में आएगा. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि पतंजलि का गाय का घी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. केवल RM Value में नाममात्र अंतर पाया गया, जो कि घी में प्राकृतिक रूप से मौजूद volatile fatty acids का स्तर बताता है. 

पतंजलि ने RM Value को एक प्राकृतिक और क्षेत्रीय रूप से बदलने वाला पैरामीटर बताया, जिसकी रेंज जलवायु, पशुओं के आहार और स्थान के अनुसार बदलती रहती है. यहां तक कि FSSAI खुद भी समय-समय पर RM Value के मानक बदलता रहता है. कंपनी ने दावा किया कि वह पूरे देश से उच्च गुणवत्ता वाले दूध और घी को कठोर मानकों के तहत एकत्र कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है.