नई दिल्ली: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े हिंसक संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र को आग के गोले में बदल दिया है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई हो रही है. इस अशांति का सबसे ज्यादा असर वहां रहने वाले भारतीय मजदूरों पर पड़ रहा है. खासकर उत्तराखंड के हरिद्वार, ज्वालापुर और रुड़की जैसे इलाकों से गए हजारों युवा अब रोज मौत के साए में जी रहे हैं. उनके परिवार भारत में रात-दिन अपनों की सलामती की दुआएं मांग रहे हैं.
शारजाह में रहने वाले ज्वालापुर के शाहरूख ने बताया कि ईरानी हमलों के बाद पिछले पांच दिनों से हालात बेहद खराब हैं. दुबई के कुछ हिस्सों में स्थिति ज्यादा नाजुक है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने की सख्त हिदायत दी है. उनकी कंपनी में काम पूरी तरह बंद है. सोसायटी में सैकड़ों भारतीय एक साथ दुआएं मांग रहे हैं कि जल्दी सब ठीक हो जाए. मंगलवार से कुछ हवाई सेवाएं शुरू हुई हैं.
कुवैत के शबाल अहमद इलाके में रहने वाले रिहान ने फोन पर बताया कि कुछ दिन पहले मिसाइलें शहर के ऊपर से गुजरती दिखीं. एक मिसाइल अमेरिकी अड्डे के पास गिरी, जिससे काला धुआं उठा और सायरन बजने लगे. रिहान उसी वक्त कार चला रहे थे. अब मिसाइलें इतनी तेज आती हैं कि देखते ही देखते लक्ष्य पर लग जाती हैं. पूरा शहर अफरा-तफरी में है.
रिहान की मां शहनाज ज्वालापुर में रोज बेटे से बात करती हैं. लेकिन खबरें सुनते ही उनका दिल बैठ जाता है. उन्होंने कहा कि बेटा रोज सुरक्षित होने की जानकारी देता है, मगर युद्ध की आशंका से नींद नहीं आती. परिवार वाले उसे जल्द भारत लौटने की सलाह दे रहे हैं. इसी तरह उत्तराखंड के कई परिवार अपनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं.
कुवैत, यूएई और बहरीन में उत्तराखंड के प्रवासी अब रोजमर्रा की जिंदगी में डर के साथ जी रहे हैं. काम बंद होने से कमाई ठप है. कई लोग जरूरी सामान भी नहीं खरीद पा रहे. वे उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द शांति स्थापित हो और वे सुरक्षित घर लौट सकें. परिवार भारत में लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.