देहरादून: उत्तराखंड में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 10 दिन की देरी से पहुंचा है. सामान्य रूप से मानसून 20 जून के आसपास आ जाता है, लेकिन इस बार यह 30 जून को दस्तक दे सका. इससे पूरे जून महीने में बारिश काफी कम हुई.
मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से 37 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई. जून के महीने में बारिश की कमी से किसानों और आम लोगों दोनों को परेशानी हुई है. खासकर पहाड़ी इलाकों में जहां बारिश पर कृषि और जल स्रोत ज्यादा निर्भर करते हैं. गर्मी के मौसम (मार्च से मई) में तो प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई थी, लेकिन जून शुरू होते ही बारिश का सिलसिला एकदम कमजोर पड़ गया.
सबसे ज्यादा बारिश की कमी हरिद्वार जिले में देखी गई. यहां सामान्य 134.3 मिलीमीटर के बजाय सिर्फ 27.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जो 79 प्रतिशत कम है. इसके बाद ऊधम सिंह नगर में 59 प्रतिशत, पौड़ी गढ़वाल में 58 प्रतिशत, देहरादून में 47 प्रतिशत, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में 46 प्रतिशत तथा चंपावत में 45 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई.
अल्मोड़ा में 22 प्रतिशत, चमोली में 18 प्रतिशत, टिहरी में 12 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 37 प्रतिशत और उत्तरकाशी में 21 प्रतिशत कम वर्षा हुई. हैरानी की बात यह है कि पूरे प्रदेश के 13 जिलों में सिर्फ बागेश्वर जिला ऐसा रहा जहां जून में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई. यहां सामान्य 146.3 मिलीमीटर के मुकाबले 152.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 4 प्रतिशत ज्यादा है.
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अब मानसून उत्तराखंड में सक्रिय हो चुका है. अगले कुछ दिनों में राज्य के ज्यादातर इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है. इससे जून की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है. हालांकि देरी से आए मानसून के कारण जलाशयों के स्तर और कृषि कार्यों पर असर पड़ा है.