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दून मेडिकल कॉलेज में मेस फीस का बड़ा खेल, निजी खाते में डाला छात्रों का पैसा; तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज

दून मेडिकल कॉलेज में मेस फीस फर्जीवाड़े के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है. जांच में निजी खाते में छात्रों की फीस जमा कराने का मामला सामने आने के बाद तीन कर्मचारियों को हटा दिया गया है. मामले की जांच अभी भी जारी है.

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Edited By: Babli Rautela
दून मेडिकल कॉलेज में मेस फीस का बड़ा खेल, निजी खाते में डाला छात्रों का पैसा; तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज
Courtesy: AI

उत्तराखंड के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की मेस फीस से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है. निदेशालय स्तर पर चल रही जांच के बाद तीन कर्मचारियों को उनके वर्तमान पदों से हटा दिया गया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि छात्रों से मेस फीस कॉलेज के अधिकृत बैंक खाते में जमा कराने के बजाय मेस मैनेजर के निजी खाते में जमा कराई गई थी. इस मामले के सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. अब पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

तीन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई

जांच में संलिप्तता पाए जाने के बाद डीएस नेगी को निदेशालय से संबद्ध किया गया है. वहीं इंदु को एचएनबी विश्वविद्यालय और आशीष नौडियाल को नर्सिंग कॉलेज देहरादून से संबद्ध कर दिया गया है. यह कार्रवाई स्वास्थ्य निदेशालय के आदेश के बाद की गई है. दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि निदेशालय के निर्देशों के अनुसार संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है.

छात्रों से निजी खाते में जमा कराई गई फीस

प्राथमिक जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि एमबीबीएस छात्रों से मेस फीस कॉलेज के अधिकृत खाते की बजाय मेस मैनेजर के निजी बैंक खाते में जमा कराई गई. यह प्रक्रिया करीब सवा वर्ष तक चलती रही और किसी स्तर पर इस पर रोक नहीं लगाई गई. मामले का खुलासा तब हुआ जब मेस संचालक ने बताया कि उसे पिछले छह महीने से भुगतान नहीं मिला है. इसके बाद जब कॉलेज के खातों की जांच की गई तो पता चला कि छात्रों द्वारा जमा की गई राशि अधिकृत खाते में पहुंची ही नहीं थी. हालांकि छात्रों ने फीस जमा करने की पुष्टि की, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया.

जांच में सामने आई कई स्तरों पर लापरवाही

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि हॉस्टल प्रबंधन, वित्तीय विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. शुरुआती जांच के बाद अब निदेशालय पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है. सूत्रों के अनुसार दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और आगे भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है.

मेस फीस घोटाले के सामने आने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि उन्होंने समय पर फीस जमा की थी, लेकिन यदि वह राशि कॉलेज के अधिकृत खाते तक नहीं पहुंची तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में वित्तीय लेनदेन की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.