पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कीर्तिखाल गांव में स्थित भैरव गढ़ी मंदिर आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर इस प्रसिद्ध मंदिर की खूबसूरती और धार्मिक महत्व की जानकारी साझा की.
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि भैरव गढ़ी मंदिर चारों ओर से प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पहाड़ों के बीच स्थित है. शांत वातावरण और पहाड़ों से घिरा यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है.
पौड़ी गढ़वाल जिले के कीर्तिखाल गांव में बना भैरव गढ़ी मंदिर नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण पहाड़ों के बीच स्थित है। भैरव जी को गढ़वाल के रक्षक के रूप में जाना जाता है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 2, 2026
पौड़ी गढ़वाल जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें। pic.twitter.com/SBP21ldQ00
भैरव गढ़ी मंदिर भगवान भैरव को समर्पित है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव को गढ़वाल का रक्षक माना जाता है. यही वजह है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं के बीच भी काफी अधिक है.
कीर्तिखाल गांव में पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित यह मंदिर उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है. मंदिर तक पहुंचने के दौरान श्रद्धालुओं को पहाड़ों की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है. यहां का शांत माहौल लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से पौड़ी गढ़वाल पहुंचने पर भैरव गढ़ी मंदिर के दर्शन करने की अपील की. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंदिर को उत्तराखंड आने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में प्रस्तुत किया.
भैरव गढ़ी मंदिर को लेकर स्थानीय आस्था सदियों से जुड़ी हुई मानी जाती है. भगवान भैरव की पूजा को क्षेत्र की सुरक्षा और कल्याण से जोड़कर देखा जाता है. श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भैरव के दर्शन और पूजा अर्चना करते हैं.
पौड़ी गढ़वाल वैसे भी अपने पहाड़ों, हरियाली और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है. ऐसे में भैरव गढ़ी मंदिर धार्मिक पर्यटन के साथ साथ प्राकृतिक पर्यटन के लिहाज से भी खास स्थान रखता है.
उत्तराखंड की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु पौड़ी गढ़वाल के कीर्तिखाल गांव स्थित इस मंदिर को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं. पहाड़ों के बीच भगवान भैरव के दर्शन और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता इस यात्रा को यादगार बना सकती है.