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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का 'नो-शिफ्टिंग' प्लान, मंत्रियों की अपनी ही सीट पर होगी 'अग्निपरीक्षा'; सीट बदली तो कटेगा टिकट

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सख्त रणनीति बनाई है. पार्टी मंत्रियों को उनकी मौजूदा सीट पर ही काम और लोकप्रियता की कसौटी पर परखेगी. किसी को भी सीट बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी ताकि मतदाताओं में गलत संदेश न जाए.

Kanhaiya Kumar Jha
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का 'नो-शिफ्टिंग' प्लान, मंत्रियों की अपनी ही सीट पर होगी 'अग्निपरीक्षा'; सीट बदली तो कटेगा टिकट
Courtesy: Social Media

देहरादून: भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने मंत्रियों और विधायकों के लिए अग्निपरीक्षा की तैयारी कर ली है. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड और अन्य चुनावी राज्यों में मंत्रियों की लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने जा रहा है. सबसे कड़ा फैसला यह लिया गया है कि किसी भी मंत्री को उनकी वर्तमान विधानसभा सीट छोड़कर दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया जाएगा. यह फैसला मंत्रियों के प्रदर्शन को सीधे तौर पर आंकने के लिए लिया गया है.

अक्सर देखा गया है कि चुनाव जीतकर मंत्री बनने के बाद कई नेता अगले चुनाव में अपनी सुरक्षित सीट की तलाश में दूसरी जगह चले जाते हैं. पार्टी संगठन का मानना है कि इससे मतदाताओं के बीच एक नकारात्मक संदेश जाता है कि मंत्री ने अपने क्षेत्र में विकास नहीं किया है. जिस सीट को मंत्री छोड़ते हैं, वहां नए प्रत्याशी के लिए जीत हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है. लिहाजा, भाजपा ने इसे दोहरे नुकसान के तौर पर देखते हुए सीट बदलने पर पाबंदी लगा दी है.

आंतरिक सर्वे से होगी लोकप्रियता की जांच 

केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही एक व्यापक आंतरिक सर्वे शुरू करने जा रहा है ताकि धरातल पर मंत्रियों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके. इस सर्वे में यह देखा जाएगा कि मंत्रियों के पद पर रहने से उनके विधानसभा क्षेत्र को कितना लाभ हुआ और जनता में उनकी स्वीकार्यता कितनी बची है. संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रियों को उनकी अपनी विधानसभा में छवि और काम की कसौटी पर ही परखा जाएगा. केवल लोकप्रिय चेहरों को ही टिकट देकर पार्टी चुनावी जोखिम को कम करना चाहती है.

सत्ता की हैट्रिक के लिए कड़े पैमाने 

पार्टी के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की बड़ी चुनौती है, इसलिए टिकट वितरण के पैमाने भी बेहद कड़े रखे गए हैं. संगठन चाहता है कि जो मंत्री जिस सीट से जीतकर आया है, वह वहीं से दोबारा चुनाव लड़े ताकि उसकी जवाबदेही तय हो सके. किसी नई सीट पर जाने से वहां पहले से तैयारी कर रहे अन्य दावेदारों में रोष पनपने का खतरा रहता है, जिससे पार्टी की एकता प्रभावित हो सकती है. 

विधायकों के लिए प्रदर्शन सुधारने की चेतावनी यह चुनौती केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायकों के लिए भी आने वाला समय परीक्षा की घड़ी है. नए पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को कड़ा संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर सुस्ती नहीं चलेगी. विधायकों को अगले एक साल के भीतर अपना प्रदर्शन सुधारने और जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं. क्षेत्र में सक्रियता की कमी को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, क्योंकि लक्ष्य केवल आगामी विजय सुनिश्चित करना है.

आगामी चुनावी रण की तैयारी 

भाजपा संगठन अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुका है और हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी जा रही है. मंत्रियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि वे अपनी वर्तमान सीट पर ही फोकस करें और किसी भी प्रकार की नई सीट की जुगत में समय व्यर्थ न करें. आने वाले समय में कड़े अनुशासन और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर ही भविष्य का फैसला होगा. पार्टी की इस रणनीति से स्पष्ट है कि इस बार केवल कर्मठ और बेहद लोकप्रिय नेताओं को ही चुनावी मैदान में उतारा जाएगा.