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'दुनिया से भीख मांगते हैं...', पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का देश की कंगाली पर बड़ा कबूलनामा

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी आर्थिक लाचारी स्वीकार करते हुए कहा है कि उन्हें और सेना प्रमुख को कर्ज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिससे देश के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है.

Kanhaiya Kumar Jha
'दुनिया से भीख मांगते हैं...', पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का देश की कंगाली पर बड़ा कबूलनामा
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पकिस्तान की आर्थिक स्थिति कितनी दयनीय है, ये किसी से छिपी नहीं है. लेकिन देश की बदहाली को लेकर पहली बार पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का कबूलनामा सामने आया है. पीएम शहबाज ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था विभिन्न देशों से मिले कर्ज की भरोसे चल रही है और इस कर्ज को पाने के लिए उन्हें और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को आत्मसम्मान तक का समझौता करना पड़ रहा है. उन्होंने इसे एक शर्मिंदगी भरा विषय बताते हुए कहा कि कई बार जब उन्हें कर्ज पाने के लिए समझौते करने पड़ते हैं तो उन शर्तों को भी मानना पड़ता है, जो देश की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, लेकिन वो ऐसा करने के लिए मजबूर हैं.

शहबाज शरीफ ने अपनी बात विस्तार से रखते हुए कहा कि कर्ज मांगना किसी भी राष्ट्र के गौरव के लिए एक बड़ा बोझ होता है. जब वे दुनिया के अलग-अलग देशों से मदद मांगने जाते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर भारी शर्मिंदगी महसूस होती है. प्रधानमंत्री के अनुसार, कर्ज लेने वाला अक्सर अपनी शर्तों को मनवाने की स्थिति में नहीं होता, जिससे पाकिस्तान को कई बार ऐसे समझौते करने पड़ते हैं जो उनके आत्म-सम्मान के विरुद्ध होते हैं.

विदेशी मुद्रा भंडार का उतार-चढ़ाव

देश की आर्थिक प्रगति पर चर्चा करते हुए शरीफ ने कहा कि वर्तमान में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग दोगुना हो गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस भंडार में मित्र देशों से लिए गए लोन का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक उम्मीद कर रहा है कि साल के अंत तक यह भंडार 20 बिलियन डॉलर के पार चला जाएगा. प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि यह रिकॉर्ड स्तर तो होगा, लेकिन वास्तविक आत्मनिर्भरता अभी भी बहुत दूर है.

IMF के साथ सख्त समझौते 

पाकिस्तान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 1.2 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त करने में सफल रहा है. यह पैसा जलवायु परिवर्तन और आर्थिक स्थिरता के कार्यक्रमों के तहत मिला है. शरीफ ने बताया कि वित्त मंत्री और उनकी टीम ने IMF के सामने पाकिस्तान का पक्ष मजबूती से रखा है. हालांकि, इस फंडिंग को प्राप्त करने के लिए देश को अपनी खर्च प्रणालियों और मौद्रिक नीतियों में कई कड़े और कड़वे बदलाव करने पड़े हैं.

केंद्रीय बैंक और आर्थिक नीतियां 

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को विशेष निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि गवर्नर को व्यापार जगत की समस्याओं को सुनना चाहिए और पूंजी तक उद्यमियों की पहुंच आसान बनाने के लिए साहसिक कदम उठाने चाहिए. फिलहाल, केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 10.5% पर स्थिर रखा है ताकि महंगाई को नियंत्रित किया जा सके. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून तक देश की जीडीपी विकास दर 4.75% तक पहुंच सकती है.

अपने संबोधन के अंत में शहबाज शरीफ ने आशा जताई कि पाकिस्तान अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अब सरकार का ध्यान केवल कर्ज लेने पर नहीं, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा करने और गरीबी मिटाने पर है. शरीफ ने निर्यातकों से आग्रह किया कि वे अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करें ताकि आने वाले समय में पाकिस्तान को किसी भी देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था के सामने हाथ न फैलाना पड़े और देश स्वाभिमान से खड़ा हो सके.