उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में जानकारी दी है कि राज्य के सीमावर्ती गांवों को तेजी से विकसित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत राज्य के 51 बॉर्डर गांवों का योजनाबद्ध और समग्र विकास किया जा रहा है, जिससे वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.
आसान भाषा में समझें तो सरकार का मकसद यह है कि जो गांव देश की सीमाओं के पास हैं, वहां भी शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाई जाएं. इसके लिए सड़कों को बेहतर बनाया जा रहा है जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो. शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की सुविधाएं सुधारी जा रही हैं, जिससे बच्चों को अच्छी पढ़ाई मिल सके. स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर शहरों में न जाना पड़े.
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 51 सीमांत गांवों का सुनियोजित एवं समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है.
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, पर्यटन एवं आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को सुदृढ़ कर सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी है. हमारा… pic.twitter.com/FKyD1XWN3r— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 22, 2026Also Read
इसके अलावा, गांवों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क जैसी संचार सुविधाओं को भी बेहतर किया जा रहा है. इससे लोगों को डिजिटल दुनिया से जुड़ने में मदद मिलेगी और वो ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी खास काम हो रहा है, ताकि इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हों.
सरकार का यह भी प्रयास है कि सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए. यानी वहां रहने वाले लोगों को भी वही मौके मिलें जो शहरों में रहने वालों को मिलते हैं. रोजगार के साधन बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लोग अपने गांव में ही काम करके अच्छी कमाई कर सकें और उन्हें पलायन न करना पड़े.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इन गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है. इसका मतलब है कि गांव खुद अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें और वहां के लोग आर्थिक रूप से मजबूत बनें. जब गांव मजबूत होंगे, तो देश भी मजबूत होगा.