उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में पुलिस विभाग के 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों (दरोगाओं) को नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब भाई-भतीजावाद नहीं चलेगा. सरकार के लिए प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही परिवार है. सरकारी नौकरियों में सभी युवाओं को योग्यता और मेरिट के आधार पर समान अवसर दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां होती थीं. आवेदन कोई करता था, परीक्षा कोई दूसरा देता था और नौकरी किसी तीसरे व्यक्ति को मिल जाती थी. उन्होंने इसे सैफई सिंडिकेट का दौर बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म कर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू की है.
योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों से पूछा कि क्या चयन के लिए किसी ने उनसे सिफारिश कराई या पैसे मांगे? क्या किसी ने दबाव बनाकर नियुक्ति हासिल करने की कोशिश की? उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में इस तरह की अनियमितताओं की कोई जगह नहीं है.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के विभिन्न विभागों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है. इनमें अकेले पुलिस विभाग में 2.30 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती हुई है.
उन्होंने बताया कि सरकार ने छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में भर्तियों का सिलसिला जारी है. दीपावली के बाद भैयादूज के अगले दिन राजस्व विभाग के 1,200 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. इसके अलावा 42 हजार होमगार्ड और 32 हजार पुलिस कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. करीब 25 हजार शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र दिए जाने हैं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर थी. उस समय कर्मचारियों की संख्या आज की तुलना में लगभग आधी होने के बावजूद सरकार को वेतन देने में परेशानी होती थी. आज स्थिति बदल चुकी है और सरकार के पास जरूरत पड़ने पर एक साल तक कर्मचारियों को बैठाकर वेतन देने की क्षमता है.
उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र देना सरकार की कृपा नहीं, बल्कि उसका कर्तव्य है. प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और विकास की रफ्तार तेज हुई है.
मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला कार्यबल की भागीदारी तीन गुना हुई है. उन्होंने लखनऊ स्थित एचसीएल टेक परिसर का उदाहरण दिया, जहां 2017 में करीब 100 कर्मचारी थे. अब यह संख्या बढ़कर 12,500 हो गई है. नई सुविधाओं के शुरू होने से यहां छह हजार और लोगों को रोजगार मिलेगा. उन्होंने बताया कि महिलाएं रात की शिफ्ट में भी काम कर रही हैं और उन्नाव, बाराबंकी, सीतापुर तथा हरदोई जैसे जिलों में अपने घर सुरक्षित लौट रही हैं.
योगी ने कहा कि प्रदेश के 56 जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक बहुमंजिला आवासीय भवन बनाए गए हैं. पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता छह हजार से बढ़ाकर एक साथ 60 हजार कर दी गई है. हर जिले में साइबर थाना और प्रत्येक पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है. सात जिलों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है.
उन्होंने नवचयनित दरोगाओं से कहा कि गरीब, पीड़ित और वंचित लोगों के प्रति संवेदनशील रहें, जबकि अपराधियों और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. नए पुलिसकर्मियों को तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है. नए उपनिरीक्षकों को अपनी कार्यशैली से यह भरोसा मजबूत करना होगा. उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा और मेहनत प्रदेश के विकास में योगदान देगी.