लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है. प्रदेश में देश का पहला डाटा कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है. इस परियोजना के लिए अमेरिकी कंपनी बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप यानी BCG का चयन किया गया है. कंपनी अगले छह महीने में विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी, जिसके आधार पर परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.
राज्य सरकार ने डाटा कॉरिडोर विकसित करने की जिम्मेदारी राज्य परिवर्तन आयोग को सौंपी है. आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह के अनुसार पहले चरण में छह गीगावाट क्षमता के डाटा क्लस्टर स्थापित करने की योजना है. अनुमान है कि प्रति गीगावाट डाटा सेंटर स्थापित करने में करीब एक लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस तरह पहले चरण में लगभग छह लाख करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है.
डाटा कॉरिडोर के लिए उपयुक्त स्थान का चयन सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी. BCG प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता, भूमि की भार वहन क्षमता, पानी की उपलब्धता और निर्बाध बिजली आपूर्ति का विस्तृत अध्ययन करेगी. डाटा सेंटर के सफल संचालन के लिए चौबीसों घंटे बिजली और पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है. इसलिए स्थान का वैज्ञानिक तरीके से चयन किया जाएगा.
डाटा सेंटर स्थापित करने से पहले विशेषज्ञ यह भी जांच करेंगे कि जमीन भारी सर्वर, नेटवर्किंग उपकरणों और कूलिंग सिस्टम का भार सुरक्षित रूप से सहन कर सकती है या नहीं. इसके लिए 10 से 15 मीटर गहराई तक मिट्टी के नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा. साथ ही भूजल स्तर, भविष्य में जमीन धंसने की संभावना और भूकंप जैसे प्राकृतिक जोखिमों का भी मूल्यांकन किया जाएगा.
डाटा सेंटर में हजारों सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे काफी गर्मी पैदा होती है. इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम और बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा एक मेगावाट क्षमता के डाटा सेंटर के संचालन के लिए लगभग एक मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है. इसलिए बिजली और जल संसाधनों की उपलब्धता इस परियोजना की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी.