लखनऊ: कालाजार मुक्त उत्तर प्रदेश अब हकीकत बनता दिख रहा है. राज्य सरकार कालाजार बुखार पर पूरी तरह काबू पाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछले पांच महीनों के दौरान इस बीमारी का कोई नया मरीज नहीं मिला है.
जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी संक्रामक बीमारियों पर सटीक सर्विलांस से नियंत्रण के बाद अब कालाजार जैसी जानलेवा बीमारी भी दम तोड़ रही है. यह जन स्वास्थ्य के लिए बड़ी राहत की खबर है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, संत रविदासनगर, गाजीपुर, कुशीनगर, बलिया और देवरिया जैसे जिलों में पहले कालाजार का खतरा ज्यादा था. इन इलाकों में मादा बालू मक्खी के कारण संक्रमण फैलता था. अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है. सरकार इन क्षेत्रों में घर-घर जांच अभियान चला रही है जिससे बीमारी पर अच्छा नियंत्रण हासिल हुआ है.
मौजूदा स्थिति में राज्य सरकार राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम की सूची से कालाजार को हटाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने वाली है. अगर आगे भी नए मामले नहीं आए तो उत्तर प्रदेश को कालाजार मुक्त प्रदेश घोषित कर दिया जाएगा. इस बीमारी में लगातार बुखार, बार-बार दस्त और लीवर में सूजन जैसे लक्षण दिखते हैं. समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की जान जा सकती है. आरके-39 किट से आसानी से पहचान हो जाती है.
सरकार ने मादा बालू मक्खी को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाए. इन मक्खियों की लंबाई सिर्फ डेढ़ से साढ़े तीन मिलीमीटर होती है. ये संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण लेकर दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैलाती हैं. 2015 में इन जिलों में 13 मरीज मिले थे जिनमें से तीन की मौत हो गई थी. अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं.
कालाजार से मुक्ति पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है. जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी अन्य बीमारियों पर भी इसी तरह काम हो रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि वेक्टर जनित सभी रोगों पर काबू पाया जाए. लोगों को सलाह दी जाती है कि मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और साफ-सफाई पर ध्यान दें. कालाजार मुक्त उत्तर प्रदेश बनने से न सिर्फ जानें बचेंगी बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ भी कम होगा. यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की मेहनत का नतीजा है. अगर आगे भी यही स्थिति बनी रही तो जल्द ही प्रदेश इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा.