उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे संगठित हनीट्रैप गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को निशाना बनाकर उगाही का जाल बिछा रखा था. आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर युवकों से दोस्ती करते थे और बाद में उन्हें फर्जी पुलिस कार्यालय में बुलाकर ब्लैकमेल करते थे. पुलिस ने कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है.
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फर्जी इंस्टाग्राम ID बनाकर या लड़की बनकर युवकों से संपर्क करते थे. बातचीत बढ़ने के बाद अश्लील चैट और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता था. इसके बाद मिलने के बहाने उन्हें एक तय स्थान पर बुलाया जाता था, जहां ब्लैकमेलिंग की पूरी साजिश रची जाती थी.
आरोपियों ने मोहकमपुर क्षेत्र में पुलिस चौकी जैसा दिखने वाला कार्यालय तैयार कर रखा था. वहां क्राइम रजिस्टर, FIR रजिस्टर, मोहर, नेम प्लेट और अन्य सामान रखे गए थे. आरोपी खुद को CO, दरोगा और सिपाही बताकर पीड़ितों को जेल, मुकदमे और एनकाउंटर का डर दिखाते थे. इसी दबाव में उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी.
पीड़ित की शिकायत पर ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार किया. पुलिस ने उनके कब्जे से बिना नंबर प्लेट की कार, अतिरिक्त नंबर प्लेट, मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, टेलीफोन, मोहरें और अन्य सामान बरामद किया. इन वस्तुओं का इस्तेमाल लोगों को पुलिस कार्रवाई का झूठा विश्वास दिलाने के लिए किया जाता था.
गिरफ्तार आरोपी राहुल पाल की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ दिखाई दे रहा है. हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है और हर पहलू की पड़ताल जारी है.
एसपी सिटी विनायक भोसले ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है. गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है. पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और लोगों से सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सतर्क रहने की अपील भी की है.