लखनऊ: उत्तर प्रदेश के युवा अब नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं भागना चाहते. वे अपने प्रदेश में रहकर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान और लखनऊ AI सिटी जैसे बड़े कदम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
आज UP का युवा सिर्फ जॉब सिकर नहीं रह गया है. वह उद्यमी बनना चाहता है. कोई अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, कोई डिजिटल सेवाएं देना चाहता है तो कोई स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना चाहता है. प्रदेश में बढ़ते निवेश और नई औद्योगिक नीतियां इस बदलती सोच को मजबूती दे रही हैं.
फरवरी 2024 में चौथे ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में उत्तर प्रदेश में 14,000 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स शुरू हुए. इनकी कुल निवेश राशि 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. ये प्रोजेक्ट निर्माण, ग्रीन एनर्जी, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, हाउसिंग, होटल और एजुकेशन जैसे कई क्षेत्रों में हैं. जब इतने बड़े पैमाने पर काम शुरू होता है तो युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता के मौके भी बढ़ जाते हैं.
फैक्टरियों के आसपास निर्माण कार्य, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और तकनीकी सेवाओं की जरूरत बढ़ती है. आईटी कंपनियों में डिजिटल स्किल वाले युवाओं की मांग रहती है. फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में किसान, मार्केटिंग और सप्लाई चेन से जुड़े काम निकलते हैं.
सरकार का मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान उन युवाओं को मदद पहुंचा रहा है जो अपना काम शुरू करना चाहते हैं. ट्रेनिंग, मेंटरशिप और फाइनेंशियल सपोर्ट के जरिए युवाओं को अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने का मौका मिल रहा है.
लखनऊ में विकसित हो रही AI सिटी टेक्नोलॉजी से जुड़े युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है. साथ ही उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी इंक्यूबेशन सेंटर, मेंटरिंग और फंडिंग के जरिए नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है. युवा अब टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप, डिजिटल मार्केटिंग, लोकल प्रोडक्ट ब्रांडिंग और ऑनलाइन सेवाएं शुरू कर रहे हैं.