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सीएम आवास योजना का सकारात्मक असर, 84% लाभार्थियों ने कहा- 'पक्के मकान से बदल गया जीवन'

रिपोर्ट के अनुसार 77 प्रतिशत लाभार्थियों का कहना है कि रहन-सहन की गुणवत्ता बढ़ी है और उनका जीवन पहले से ज्यादा आरामदायक हो गया है. यह सर्वे वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत दिए गए घरों पर आधारित है.

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Edited By: Antima Pal
सीएम आवास योजना का सकारात्मक असर, 84% लाभार्थियों ने कहा- 'पक्के मकान से बदल गया जीवन'
Courtesy: Pinterest

CM Awas Yojana: मुख्यमंत्री आवास योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. शासन के मूल्यांकन प्रभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में 84 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि पक्का घर मिलने से अब उन्हें सर्दी, गर्मी और बारिश से बेहतर सुरक्षा मिल रही है.

सीएम आवास योजना का सकारात्मक असर

सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश परिवारों ने पक्के मकान को अपने जीवन स्तर में सुधार का मुख्य कारण बताया. रिपोर्ट के अनुसार 77 प्रतिशत लाभार्थियों का कहना है कि रहन-सहन की गुणवत्ता बढ़ी है और उनका जीवन पहले से ज्यादा आरामदायक हो गया है. यह सर्वे वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत दिए गए घरों पर आधारित है.

सर्वे में कुल 1464 परिवारों से राय ली गई, जिनमें से 1457 परिवारों ने स्वीकार किया कि पक्का मकान मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है.

आत्मसम्मान और सामाजिक सम्मान में बढ़ोतरी

सर्वे में 71 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि पक्का घर बनने से समाज में उनका सम्मान बढ़ा है. उन्हें अब सामाजिक बराबरी का एहसास हो रहा है. पक्का मकान न सिर्फ सुरक्षा दे रहा है बल्कि लोगों के आत्मसम्मान को भी मजबूत कर रहा है.

योजना की खासियत

प्रदेश सरकार ने फरवरी 2018 में मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शुरू की थी. इस योजना का मकसद उन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है जो प्राकृतिक आपदाओं, कालाजार या अन्य कारणों से प्रभावित हैं. इसमें मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, बैगा जैसे विशेष वर्गों, वनटांगिया परिवारों, दिव्यांगजनों और 18 से 50 वर्ष की निराश्रित विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है.

प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित पात्र परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिलता है. अब तक प्रदेश में 5.87 लाख से ज्यादा आश्रयहीन ग्रामीण परिवारों को आवास दिए जा चुके हैं. इनमें 1.30 लाख दिव्यांगजन और 72 हजार से अधिक निराश्रित विधवाएं शामिल हैं.