यूपी के सीतापुर जिले की महमूदाबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक आशा रानी मौर्य को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर की है, हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को हटा दिया और नए सिरे से, थोड़ा संभलकर एक और पोस्ट लिखी. पत्रकारों और शुभचिंतकों के नाम लिखी गई अपनी पहली पोस्ट में आशा रानी मौर्य की पीड़ा और गुस्सा साफ झलक रहा था. उन्होंने लिखा कि बीजेपी में मौर्य समाज के निष्ठावान और संघर्षशील कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं है.
आशा रानी मौर्य ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बाहर से आए बागी और दलबदलुओं को प्राथमिकता दिया जाना और वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कहीं न कहीं पीड़ादायक है. फिर भी हम समाज, सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई मजबूती से लड़ते रहेंगे. बागी और दलबदलुओं को जिक्र कर आशा रानी ने समाजवादी पार्टी से आए मनोज पांडेय को मंत्री बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर की, हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिखा.
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल होने के बाद बीजेपी विधायक आशा रानी मौर्य ने कुछ तब्दीली करते हुए नई पोस्ट लिखी. दूसरी पोस्ट में बागी और दलबदलु नेताओं को प्राथमिकता वाली बात हटा दी, और थोड़ा संभलते हुए लिखा- शुभचिंतकों और समर्थकों का स्नेह के लिए धन्यवाद और आभार, आपके सबके समर्थन ने मुझे समाज और संगठन के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने की प्रेरणा दी है. 35 वर्षों से पार्टी और संगठन के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया जो पूरी मजबूती से आगे भी हमेशा जारी रहेगा. उन्होंने मंत्रिमंडल में जगह न मिलने की बात लिखे बिना ही कहा कि कहीं न कहीं मन में थोड़ी जरूर हुई है लेकिन यह पीड़ा मेरे संकल्प को कमजोर नहीं करेगी बल्कि समाज और संगठन के लिए और लगन व मेहनत से काम करने के लिए प्रेरणा बनेगी.