वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में एक विशाल धार्मिक सेना के गठन की घोषणा कर हलचल मचा दी है. उन्होंने इसे 'चतुरंगिणी सेना' का नाम दिया है जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म, संस्कृति और गौ वंश की रक्षा करना होगा. हालांकि यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब वे उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज किए गए पॉक्सो के एक मामले का सामना कर रहे हैं.
शंकराचार्य के अनुसार 'चतुरंगिणी सेना' का उल्लेख महाभारत काल में मिलता है जिसमें पैदल, घुड़सवार, हाथी और रथ शामिल होते थे. इस नई सेना में सभी हिंदू जातियों से 2,18,000 सदस्यों को जोड़ा जाएगा जिसमें पुरुष, महिलाएं और थर्ड जेंडर भी शामिल हो सकेंगे। यह बल पारंपरिक और आधुनिक हथियारों से लैस होकर हिंदू धर्म की रक्षा करेगा। वाराणसी में समर्थकों के साथ खड़े स्वामी ने स्पष्ट किया कि इसका औपचारिक शुभारंभ अगले साल प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर होगा.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पुलिस इस नए संगठन की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है. बिना लाइसेंस वाले हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन या उन्हें रखने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक रूप से हथियारों को लहराना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। शंकराचार्य की सेना का विचार समाज की रक्षा के लिए है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे कानून व्यवस्था के लिए एक संभावित चुनौती के रूप में देख रही हैं.
यह घोषणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हालिया विवाद के बीच आई है. पिछले महीने प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य को पालकी में संगम जाने से रोका गया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने 'कालनेमि' का जिक्र किया था जो साधु के वेश में एक दानव था. इस बयान को शंकराचार्य पर सीधा हमला माना गया था. दोनों पक्षों के बीच बढ़ते मतभेद अब धार्मिक सेना के गठन और कानूनी मुकदमों तक पहुंच गए हैं.
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की शिकायत पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने शंकराचार्य और उनके शिष्यों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. आरोप है कि आश्रम में रहने वाले छोटे शिष्यों या बटुकों का शोषण किया गया है. पुलिस ने इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके सहयोगी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य को नामजद किया है. पॉक्सो कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एक बहुत सख्त कानूनी ढांचा प्रदान करता है
शंकराचार्य ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने की साजिश बताया है. उन्होंने कहा कि ये सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं. हालांकि विपक्ष के कुछ प्रमुख नेताओं ने स्वामी का समर्थन किया है. कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर पॉक्सो एक्ट में कड़ी सजा और जेल का प्रावधान है. अब यह मामला अदालत और पुलिस जांच के अधीन है जिससे उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.