राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने एनसीआर के अंतर्गत आने वाले आठ जिलों में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने के लिए परिवर्तन योजना लागू कर दी है. इस संबंध में बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी गई.
इस योजना का उद्देश्य पुराने प्रदूषणकारी ट्रकों और बसों की जगह आधुनिक, कम प्रदूषण फैलाने वाले बीएस-6 तथा इलेक्ट्रिक व्यावसायिक वाहनों को बढ़ावा देना है, जिससे एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके.
योजना के तहत जिन वाहन मालिकों के पुराने ट्रक या बस अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र पर जमा कराए जाएंगे, उन्हें नया बीएस-6 अथवा इलेक्ट्रिक व्यावसायिक वाहन खरीदने पर 100 प्रतिशत मोटर वाहन कर यानी रोड टैक्स में छूट दी जाएगी. इसके साथ ही नए वाहन की रजिस्ट्रेशन फीस भी पूरी तरह माफ रहेगी. यदि कोई व्यक्ति स्क्रैपिंग के बाद नया वाहन लेने के बजाय प्रयुक्त यानी सेकेंड हैंड व्यावसायिक वाहन खरीदता है, तो उसे 50 प्रतिशत मोटर वाहन कर में छूट का लाभ मिलेगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों प्रकार की कर छूट 10 वर्ष तक प्रभावी रहेगी.
परिवर्तन योजना फिलहाल एनसीआर के आठ जिलों में लागू की गई है. इनमें मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, बागपत और बुलंदशहर शामिल हैं. इन जिलों में पुराने व्यावसायिक वाहनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकृत रजिस्ट्रीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र पर स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा. योजना के तहत बीएस-एक, बीएस-दो, बीएस-तीन और बीएस-चार उत्सर्जन मानक वाले पुराने ट्रकों और बसों को स्क्रैप कराया जाएगा. इसमें हल्के, मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों के साथ हल्की, मध्यम और भारी श्रेणी की बसें भी शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों की संख्या घटेगी, स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और एनसीआर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिलेंगे.