नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से संवाद किया. अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, रोजगार, डेटा और युवाओं की क्षमता को केंद्र में रखा. राहुल गांधी ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है. उन्होंने युवाओं की समस्याओं को समझने और व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया.
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत तीन शब्दों से की- दर्द, डेटा और दौलत. उन्होंने कहा कि युवाओं के पास क्षमता और ऊर्जा है, लेकिन उनकी मेहनत का उचित लाभ उन्हें नहीं मिल रहा. उनके मुताबिक, युवाओं द्वारा पैदा किया जाने वाला डेटा भी देश की महत्वपूर्ण संपत्ति है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युवा शक्ति और डेटा भारत की प्रगति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्होंने युवाओं की बुद्धिमत्ता, कल्पनाशक्ति और क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था उनके रास्ते में बाधा नहीं बने तो देश का भविष्य इन्हीं के दम पर मजबूत होगा. उन्होंने चीन, अमेरिका और रूस का उदाहरण देते हुए भारत की युवा आबादी की ताकत पर जोर दिया.
राहुल गांधी ने 21वीं सदी की तकनीक में डेटा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भारत के पास बड़ी मात्रा में डेटा मौजूद है. उन्होंने AI का उदाहरण देते हुए कहा कि डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास संभव नहीं है. उनके मुताबिक, जिस तरह पिछली सदी में पेट्रोल इंजन के लिए जरूरी था, उसी तरह आज AI के लिए डेटा अहम है.
शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा कि परिवार अपनी बचत से लाखों रुपये खर्च करके बच्चों को पढ़ाते हैं. इंजीनियरिंग, मेडिकल या दूसरी डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं के सामने रोजगार का संकट बना रहता है. उन्होंने दावा किया कि एक हजार युवाओं में केवल 12 को प्राइवेट नौकरी मिल पाती है. उन्होंने मौजूदा शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बताया.
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया की लत और बेरोजगारी को भी युवाओं की परेशानी से जोड़ा. उन्होंने कहा कि पढ़ाई पर पैसा खर्च करने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर कई युवा डिलीवरी और कैब जैसी नौकरियों में लंबे समय तक काम करने को मजबूर हैं. एक छात्र ने बताया कि उसने परीक्षा की तैयारी के लिए डिलीवरी का काम किया, सेना की परीक्षा में एक अंक से चूक गया और बाद में पेपर लीक जैसी घटनाओं से उसका भरोसा और प्रभावित हुआ.