उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. राज्य के विभिन्न आयोगों, बोर्डों और निगमों में लंबे समय से खाली पड़े राजनीतिक पदों पर जल्द नियुक्तियां होने की संभावना है.
सरकार और भारतीय जनता पार्टी संगठन के बीच कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अंतिम मंजूरी मिलते ही पहली सूची जारी की जा सकती है.
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में अनुसूचित जाति आयोग, अल्पसंख्यक आयोग समेत चार से पांच प्रमुख आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी. इसके बाद अन्य बोर्डों, निगमों और आयोगों में भी रिक्त पदों को भरा जाएगा. सरकारी सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से सरकार और भाजपा संगठन के बीच संभावित नामों पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा था. हाल ही में हुई बैठकों में उम्मीदवारों के पैनल की स्क्रीनिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि 80 से अधिक प्रमुख नामों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल औपचारिक मंजूरी का इंतजार है.
प्रदेश में कई आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य पद लंबे समय से रिक्त हैं. इनमें सबसे प्रमुख एससी आयोग और अल्पसंख्यक आयोग शामिल हैं. इन निकायों में नियुक्तियां नहीं होने के कारण कई मामलों के निस्तारण और प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ रहा है. इसके अलावा बाल आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है, जबकि आयोग के कई सदस्य पद पहले से खाली हैं. ऐसे में सरकार एक साथ कई आयोगों में नई टीम नियुक्त करने की तैयारी कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार नियुक्तियों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी. पहले चरण में चार से पांच प्रमुख आयोगों की घोषणा होगी, जबकि दूसरे चरण में अन्य आयोगों, बोर्डों और निगमों के पद भरे जाएंगे. इस रणनीति का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को गति देना और लंबे समय से निष्क्रिय पड़े संवैधानिक तथा अर्ध-सरकारी निकायों को सक्रिय करना है.