प्रदेश सरकार ने स्कूलों और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्राओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-ट्राइसाइकिल वितरण की नई नियमावली लागू कर दी है.
नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों का चयन अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य ऐसे दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के जारी रह सके.
नई नियमावली के अनुसार ई-ट्राइसाइकिल का लाभ उन छात्राओं को प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा, जिनकी दिव्यांगता अधिक गंभीर होगी. यदि पात्र आवेदकों की संख्या अधिक होती है तो ऑनलाइन आवेदन पहले करने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाएगी. शासन का मानना है कि इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और पात्र लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुंच सकेगी.
योजना का लाभ लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से मान्य होगा. जिन मामलों में अतिरिक्त चिकित्सकीय परीक्षण की आवश्यकता होगी, वहां जिला स्तर पर गठित तकनीकी समिति शारीरिक परीक्षण करेगी. इस समिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सहायक संभागीय अधिकारी और जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शामिल रहेंगे. समिति पात्रता से जुड़े मामलों की जांच कर अंतिम निर्णय लेगी.
नई व्यवस्था के तहत केवल 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के दिव्यांग विद्यार्थी ही ई-ट्राइसाइकिल प्राप्त करने के पात्र होंगे. लाभार्थियों को अपने शिक्षण या प्रशिक्षण संस्थान से जारी अध्ययन संबंधी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा. इस प्रमाण पत्र के सत्यापन की जिम्मेदारी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी को सौंपी गई है. सरकार ने लाभ वितरण के लिए स्पष्ट प्राथमिकता क्रम भी निर्धारित किया है.
सबसे पहले गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी. इसके बाद दिव्यांगता की गंभीरता के घटते क्रम और आय के बढ़ते क्रम के आधार पर अन्य पात्रों का चयन किया जाएगा. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी पात्र को पांच वर्ष के भीतर दोबारा ई-ट्राइसाइकिल का लाभ न मिले. योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन्हें पहले सरकार अथवा किसी जनप्रतिनिधि की ओर से ट्राइसाइकिल उपलब्ध नहीं कराई गई हो.