लखनऊ: नमामि गंगे मिशन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना अपने मूल लक्ष्य से काफी पीछे है. पार्टी का दावा है कि गंगा में गिरने वाले सीवेज को रोकने के लिए जरूरी ढांचा अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है. एसपी नेताओं ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना में गंभीर खामियां बनी हुई हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राम प्रताप सिंह ने कहा कि नमामि गंगे का मुख्य लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 7,000 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता हासिल करना है. लेकिन जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 तक केवल 3,806 एमएलडी क्षमता ही चालू है. उन्होंने दावा किया कि इससे करीब 3,194 एमएलडी का अंतर बना हुआ है, जो कुल लक्ष्य का 45 प्रतिशत से ज्यादा है.
एसपी प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्रालय के अलग-अलग समय के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते. जून 2025 के आंकड़ों में 167 एसटीपी और 3,781 एमएलडी क्षमता बताई गई थी, जबकि बाद में यह संख्या बदली हुई दिखती है. पार्टी का कहना है कि आंकड़ों की यह असंगति योजना की वास्तविक प्रगति पर सवाल खड़े करती है और पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है.
राम प्रताप सिंह ने कानपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह शहर औद्योगिक प्रदूषण की विफलता का प्रतीक बन गया है. बिंगावन एसटीपी की क्षमता 210 एमएलडी है, जिसे घरेलू सीवेज और टैनरी अपशिष्ट दोनों के लिए डिजाइन किया गया था. इसके बावजूद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में इसे लगातार बीओडी मानकों पर गैर-अनुपालक बताया गया है.
एसपी के एक अन्य प्रवक्ता नासिर सलीम ने कहा कि वाराणसी में रोजाना 300 से 400 एमएलडी सीवेज पैदा होता है. शहर में मौजूद एसटीपी की कुल क्षमता कागजों में पर्याप्त दिखती है, लेकिन पीक लोड के समय यह नाकाफी साबित होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे गंगा में बिना उपचारित गंदा पानी जाने से रोका नहीं जा सका है.
समाजवादी पार्टी का कहना है कि नमामि गंगे के तहत 203 एसटीपी परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं, जिनका लक्ष्य 6,255 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट था. इनमें से केवल 127 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जिससे लगभग 55 प्रतिशत भौतिक प्रगति हुई है. पार्टी ने मांग की है कि सरकार योजना की वास्तविक स्थिति पर जवाबदेही तय करे और गंगा की सफाई को प्राथमिकता दे.