उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की आंवला तहसील स्थित बिशारतगंज कस्बे में पेयजल संकट गहराता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि लोगों के घरों में लगे नलों से साफ पानी की जगह गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है. मजबूरी में हजारों की आबादी यही दूषित पानी पीने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करने को मजबूर है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के माध्यम से जल निगम द्वारा बिछाई गई पाइपलाइन ही इस समस्या की मुख्य वजह है. पाइपलाइन डालते समय मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके कारण जगह-जगह लीकेज हो रहा है. इन्हीं लीकेज प्वाइंट्स से गंदगी और सीवर का पानी लाइन में मिल रहा है.
बिशारतगंज कस्बे को दो जोनों में बांटकर पानी की आपूर्ति की जाती है. इसके लिए दो ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं. पहला पुराना टैंक 500 केएल क्षमता का है, जबकि बढ़ती आबादी को देखते हुए 1100 केएल क्षमता का दूसरा टैंक लगाया गया. कस्बे में करीब 3500 घरों में जल कनेक्शन हैं. पुराने टैंक से आपूर्ति के दौरान भी पाइपलाइन लीकेज की समस्या थी और नए टैंक के बाद बिछाई गई पाइपलाइन में भी यही हाल बना हुआ है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. सभासद बबलू मौर्य, प्रदीप साहू, कदीर अहमद, आस्मीन और माया देवी ने उत्तर प्रदेश जल निगम (शहरी) लखनऊ को पत्र भेजकर पाइपलाइन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और जांच की मांग की थी.
सभासदों का आरोप है कि पाइपलाइन निर्धारित गहराई से कम में डाली गई है और तय मानक से कम गेज के पाइप का इस्तेमाल हुआ है. साथ ही पाइप की गुणवत्ता भी कमजोर है, जिससे बार-बार लीकेज हो रहा है और घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है.
इस मामले में जल निगम के अवर अभियंता सलीमुद्दीन का कहना है कि कुछ जगहों पर लीकेज की शिकायतें मिली हैं. पाइपलाइन की टेस्टिंग की जा रही है और समस्याओं को दूर किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि काम मानकों के अनुसार ही किया गया है.
स्थानीय लोगों की मांग है कि पाइपलाइन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि स्वास्थ्य से जुड़ा खतरा टल सके.