नई दिल्ली: होली का त्योहार मस्ती और रंगों से भरा होता है, लेकिन जब बच्चे घर में ही खेलते हैं तो सोफे, बिस्तर की चादरें और पर्दे रंगों के शिकार हो जाते हैं. पक्के गुलाल और केमिकल कलर दाग छोड़ देते हैं, जो देखकर मन उदास हो जाता है. लेकिन अच्छी खबर ये है कि महंगे फर्नीचर या कपड़ों को बाहर भेजने की जरूरत नहीं. घर में उपलब्ध चीजों से ही इन्हें नया जैसा बनाया जा सकता है. बस सही तरीका अपनाएं और धीरे धीरे दाग हटाएं.
रंग लगते ही इंतजार न करें. सूखने से पहले ठंडे पानी से हल्के हाथों से दाग को ब्लॉट करें. ज्यादा रगड़ने से रंग फैल सकता है. सोफे या पर्दे पर अगर गुलाल लगा है तो पहले सूखा हिस्सा झाड़ लें. बिस्तर की चादर को अलग करके ठंडे पानी में भिगोएं. ये पहला कदम दाग को गहरा होने से रोकता है और सफाई आसान बनाता है.
सफेद सिरका और पानी को 1:1 अनुपात में मिलाएं. साफ कपड़े या स्पंज से इस घोल को दाग पर लगाएं और हल्के से पोंछें. सिरका एसिडिक होने से रंग के कणों को तोड़ता है. सोफे के फैब्रिक, पर्दों और बिस्तर कवर पर ये बहुत कारगर है. पहले छोटे हिस्से पर टेस्ट करें ताकि रंग न उड़े. कुछ मिनट बाद साफ पानी से पोंछ लें.
नींबू का रस निकालकर दाग पर सीधे लगाएं, फिर बेकिंग सोडा छिड़कें. ये दोनों मिलकर पेस्ट बनाते हैं जो जिद्दी रंग को हटाता है. 10 15 मिनट रखें, फिर मुलायम ब्रश से हल्के से रगड़ें और धो लें. हल्के रंग के कपड़ों या पर्दों पर ये तरीका बेहतरीन काम करता है. धूप में सुखाने से और असर बढ़ता है.
गुनगुने पानी में माइल्ड डिटर्जेंट या साबुन मिलाकर साफ कपड़े से दाग पोंछें. सोफे के लिए स्पंज यूज करें लेकिन ज्यादा गीला न करें. पर्दों को उतारकर ठंडे पानी में भिगोकर धोएं. बिस्तर की चादरों को मशीन में डालने से पहले दाग वाली जगह पर साबुन लगाकर रखें. ये तरीका फैब्रिक को नरम रखता है और चमक लौटाता है.
कोई भी नुस्खा पूरे सोफे पर लगाने से पहले छिपे हिस्से पर आजमाएं. गर्म पानी न यूज करें, इससे दाग पक्का हो सकता है. लेदर सोफे पर सिर्फ सिरका पानी या माइल्ड साबुन ही लगाएं. सफाई के बाद अच्छी तरह सुखाएं. अगली होली से पहले पुरानी चादर बिछा लें. ये छोटी छोटी सावधानियां घर को हमेशा नया रखेंगी.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.