लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़ा धर्मांतरण और यौन शोषण मामला अब गंभीर आतंकी कनेक्शन की ओर बढ़ता दिख रहा है. इस केस में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. PFI से संबंध, विदेशी संपर्क और दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से रिश्ते ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस केस की जांच अब स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी गई है. STF के हाथ में जांच जाते ही KGMU प्रशासन द्वारा बनाई गई आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति डॉ.सोनिया नित्यानंद को सौंपते हुए STF जांच की सिफारिश की थी. कुलपति ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम और विश्वविद्यालय में हुई कार्रवाई की जानकारी दी.
इस मामले का मुख्य आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज 50 हजार का इनामी था और 18 दिन की फरारी के बाद लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि KGMU में चल रहा धर्मांतरण नेटवर्क किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था. जांच में दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है.
आरोप है कि मिलकर एक संगठित रैकेट चलाया जा रहा था और कुछ महिलाओं ने पहले भी इसकी शिकायत की थी, लेकिन उस समय उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया.
रमीज की गिरफ्तारी के बाद उसका प्रतिबंधित संगठन PFI से जुड़ाव सामने आया है. पुलिस के अनुसार फरारी के दौरान रमीज PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था और उसने संगठन से कानूनी मदद लेने की कोशिश की थी. इसके सबूत मोबाइल डेटा से मिले हैं. रमीज के पिता सलीमुद्दीन के भी PFI से पुराने संबंध बताए जा रहे हैं और जांच में सामने आया है कि PFI ने उन्हें दो बार सम्मानित किया था.
सबसे गंभीर खुलासा दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन को लेकर हुआ है. पूछताछ में रमीज ने स्वीकार किया है कि उसका संपर्क दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से था. वह डॉक्टरों की एक कॉन्फ्रेंस में उससे मिला था और फरारी के दौरान शाहीन बाग भी गया था. इस इनपुट के बाद ATS ने जांच तेज कर दी है. एजेंसियों को उम्मीद है कि फोन डेटा से PFI नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित आतंकी लिंक की कई परतें खुल सकती हैं.