Modi ka Parivar : लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने 'मोदी का परिवार' मुहिम शुरू कर दी है, पीएम मोदी अपने चुनाव प्रचार में अलग-अलग जगहों पर राजनीति में परिवारवाद और वंशवाद पर हमला बोलते रहते हैं. साथ राजनीति में परिवार के चलते जनता को होने वाले नकुसान के बारे में भी बताते हैं. 'Modi ka Parivar पर रार' सीरीज में हमने कल आपको यूपी बीजेपी में परिवारवाद और वंशवाद के बारे में बताया था आज हम आपको यूपी में क्षेत्रीय दलों में परिवारवाद और वंशवाद के बारे में बता रहे हैं.
देश के साथ ही उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों में जमकर परिवारवाद देखने के लिए मिल रहा है. ये दल वंशवाद को परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. इनमें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), राष्ट्रीय लोकतांक्षिक दल (रालोद), अपना दल (सोनेलाल), जनसत्ता दल लोकतांत्रिक, निषाद पार्टी शामिल हैं, जिनमें परिवारवाद या फिर वंशवाद देखने के लिए मिलता है. इन दलों के बारे में हम आपको बता रहे हैं.
हाल ही में भाजपा गठबंधन में शामिल हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हैं. उनके पुत्र अरविंद राजभर पार्टी के प्रमुख महासचिव हैं. दूसरे पुत्र अरुण राजभर पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता हैं. राजभर ने अपने बेटों को विधान परिषद या किसी आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए योगी सरकार पर दबाव डाला लेकिन कामयाब नहीं हो सके.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र चौधरी अजीत सिंह ने 1996 में राष्ट्रीय लोक दल की स्थापना की. कोरोना से संक्रमित हो जाने के कारण अजीत सिंह का निधन हो गया, जिसके बाद उनके पुत्र जयंत चौधरी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल का खासा प्रभाव माना जाता है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में रालोद का सपा के साथ गठबंधन था और उसे आठ विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी. सपा के सहयोग से जयंत चौधरी राज्यसभा के सदस्य भी बन गए हैं. फिलहाल एनडीएम के साथ यूपी में 2 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.
प्रदेश के तीसरे बड़े राजनीतिक दल अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल हैं और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा भी है. इनके पिता सोनेलाल पटेल ने पार्टी की नींव रखी थी. अनुप्रिया के पति आशीष पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. परिवार में विवाद के बाद अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल ने अपना दल (कमेरावादी) नाम की अलग पार्टी गठित की है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कृष्णा पटेल ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया और प्रतापगढ़ सदर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. कृष्णा पटेल अपनी बड़ी बेटी पल्लवी पटेल के लिए भी टिकट चाहती थीं, लेकिन अखिलेश यादव ने उन्हें सपा के टिकट पर सिराथू विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा और वह जीतने में सफल रहीं.
भाजपा गठबंधन के साथी निर्बल इंडिया शोषित हमारा आम दल यानी (निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद हैं. वह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पुत्र राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष हैं. दूसरे बेटे इसी संगठन में प्रदेश अध्यक्ष हैं. उनका तीसरा बेटा इसी संगठन का प्रदेश प्रभारी है. साले साहब निषाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. संजय निषाद की पत्नी पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. संजय निषाद अपने बेटों को सांसद और विधायक भी बनवाने में कामयाब रहे. हालांकि उन्हें अपनी पार्टी के बजाय भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना पड़ा था. बेटे प्रवीण निषाद संत कबीर नगर से भाजपा के सांसद हैं. छोटे बेटे सरवन चौरी-चौरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं. संजय निषाद का तीसरा बेटा भी पार्टी में पदाधिकारी है.
यूपी गोड़ा के बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक नाम से नई पार्टी बनाई. वह खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उनके मौसेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह के पास पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी है.