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10 लाख में खरीदी किडनी 90 लाख में बेची, कानपुर में अवैध रैकेट का ऐसे हुआ खुलासा; कई गिरफ्तार

कानपुर में अवैध किडनी रैकेट का खुलासा हुआ, जिसमें गरीब लोगों से सस्ती किडनी लेकर महंगे दाम पर बेची जा रही थी. पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है और जांच जारी है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
10 लाख में खरीदी किडनी 90 लाख में बेची, कानपुर में अवैध रैकेट का ऐसे हुआ खुलासा; कई गिरफ्तार
Courtesy: Pinterest

कानपुर: कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक बड़े अवैध रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. आरोप है कि इस गिरोह ने उत्तराखंड के एक युवक से मात्र 10 लाख रुपये में किडनी ली और उसे बिहार की एक महिला को करीब 90 लाख रुपये में बेच दिया. मामले के सामने आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कई निजी अस्पतालों पर छापेमारी की है और डॉक्टरों, बिचौलियों व अस्पताल संचालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर उनकी किडनी कम कीमत पर खरीदता था और फिर उसे कई गुना ज्यादा रकम में बेच देता था. इस मामले में रावतपुर क्षेत्र के एक निजी अस्पताल की भूमिका संदेह के घेरे में है. क्राइम ब्रांच ने देर रात कार्रवाई करते हुए अस्पताल से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया और रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए.

शुरुआती जांच में क्या आया सामने?

प्रारंभिक जांच के अनुसार कल्याणपुर निवासी एक बिचौलिये ने उत्तराखंड के युवक को यह कहकर किडनी देने के लिए तैयार किया कि यह किसी जरूरतमंद रिश्तेदार के लिए ली जा रही है. आर्थिक तंगी के कारण युवक मान गया. इसके बाद उसकी सर्जरी कर किडनी निकाल ली गई. आरोप है कि यही किडनी बाद में मुजफ्फरनगर की 35 वर्षीय महिला को भारी रकम लेकर ट्रांसप्लांट की गई.

डोनर को कितने रुपये मिले?

हालांकि डोनर को पूरी रकम नहीं दी गई. उसे करीब 6 लाख रुपये नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाकी पैसे के लिए उसे लगातार टाल दिया गया. ऑपरेशन के बाद डोनर और मरीज को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि नेटवर्क की जानकारी छिपाई जा सके.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि डोनर की पहचान छिपाने की कोशिश की गई. उसने पहले खुद को मेरठ का निवासी बताया, लेकिन बाद में समस्तीपुर का रहने वाला निकला. इससे यह संकेत मिलता है कि पूरे नेटवर्क में फर्जी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया हो सकता है.

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब डोनर को तय रकम में से 50 हजार रुपये कम मिले और उसने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरे गिरोह की परतें खुलती चली गईं.

फिलहाल पुलिस कई संदिग्धों से पूछताछ कर रही है और अलग-अलग अस्पतालों में छापेमारी जारी है. अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.