कानपुर में 3200 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का मुख्य राजदार संजीव दीक्षित आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है. लोगों को बीमा, लोन और सरकारी योजनाओं का झांसा देकर उनके दस्तावेज हड़पने वाला यह शातिर अब जेल की सलाखों के पीछे है. इस गिरोह ने फर्जी कंपनियों के जरिए हजारों गरीबों का भरोसा तोड़ा और अरबों का टैक्स चोरी का खेल रचा.
यह खबर उन हजारों आम लोगों के लिए सदमा है जिन्होंने कभी सपना भी नहीं देखा कि उनका आधार, PAN और बैंक डिटेल किसके हाथों में चला गया. कानपुर पुलिस और साइबर टीम की जांच अब बड़े कारोबारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स तक पहुंच रही है. संजीव दीक्षित गिरोह का 10वां गिरफ्तार सदस्य है, लेकिन कहानी अभी काफी लंबी है.
संजीव दीक्षित यशोदा नगर का रहने वाला स्क्रैप कारोबारी है. उसने लोगों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर दस्तावेज लिए और 13 फर्जी फर्म बना डालीं. इन फर्मों के नाम पर 68 बैंक खातों में 3200 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ. उसकी अपनी मां की फर्म पीतांबरा इंटरप्राइजेज में भी पांच करोड़ का लेन-देन मिला है.
संजीव दीक्षित महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी वाले के करीबी सहयोगी के रूप में काम कर रहा था. दोनों ने स्क्रैप और स्लॉटर हाउस के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाईं. पूछताछ में दो नए नाम भी सामने आए हैं. पुलिस अब चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़े कारोबारियों की भूमिका की जांच कर रही है.
गिरोह छह महीने बाद फर्म बंद कर देता था. जीएसटी पोर्टल पर कैंसिलेशन दर्ज कराकर ITC क्लेम जारी रखता था. जब जांच होती तो ITC वापस कर देते. इस चक्र में करोड़ों का टैक्स माफ हो जाता. संजीव 2024 में भी जेल जा चुका था, लेकिन जमानत पर छूटते ही फिर उसी धंधे में लग गया.
पुलिस आयुक्त के अनुसार यह गिरोह गरीबों, बेरोजगारों और मजदूरों को निशाना बनाता था. अब तक महफूज, फिरोज खान, नूर आलम समेत कई आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. संजीव दीक्षित पर पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं. जांच तेज है और और छापेमारी की तैयारी चल रही है.