बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शनिवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत करने के बाद रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज और तथ्य हैं, जो यह दर्शाते हैं कि चुनाव के दौरान जन सुराज के कार्यकर्ताओं को बिना उचित कारण निशाना बनाया गया.
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें अधिकांश पटना के ही निवासी थे. उनके अनुसार, पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को रात में उनके घरों से उठाया, जबकि वे अपने घरों में सो रहे थे. उन्होंने सवाल उठाया कि घर में मौजूद व्यक्ति कानून-व्यवस्था के लिए खतरा कैसे हो सकता है. उनका आरोप है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य चुनाव के दौरान जन सुराज के संगठनात्मक कामकाज को प्रभावित करना था.
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा नीतीश कुमार ने बिहार में लोकतंत्र को जिंदा रखा था
— Sadan Singh Rajput (@SadanJee) August 2, 2026
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद अपराधी है और पुलिस का अपराधीकरण कर रहे हैं.!
पटना के SSP को निर्देश दिया हुआ कि वो बांकीपुर उपचुनाव के मतगणना से दूर रहे है
पटना SSP को… pic.twitter.com/YaSMPFdPcO
जन सुराज प्रमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि पटना SSP निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहे और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्देशों पर कार्रवाई कर रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पटना के वार्ड नंबर 22 में मतदाताओं को कथित रूप से पुलिस के माध्यम से डराने और मतदान से रोकने की कोशिश की गई. हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन या BJP की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
प्रशांत किशोर ने पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए तीन लोगों को भी मीडिया के सामने पेश किया. उनका कहना था कि इन लोगों को बिना किसी वैध कारण के घरों से उठाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव की भावना के विपरीत है. उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई.
प्रशांत किशोर ने SSP को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी राजनीति करना चाहता है, तो उसे सरकारी सेवा छोड़ देनी चाहिए. उन्होंने कहा, "अपनी ड्यूटी ईमानदारी और संविधान के अनुसार निभाइए. जन सुराज जीते या हारे, हमें डराया नहीं जा सकता." उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर SSP के खिलाफ सेवा संबंधी कार्रवाई की मांग भी की जाएगी. फिलहाल मामले में चुनाव आयोग या पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है.