कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में नाबालिग बच्ची के साथ हुए क्रूर गैंगरेप मामले ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है. मुख्य आरोपी, जो खुद एक पुलिस उप-निरीक्षक (दारोगा) है, अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर बना हुआ है, जिससे कानून व्यवस्था पर गहरा संदेह पैदा हो रहा है.
मामला 5 जनवरी की रात का है, जब 14 वर्षीय किशोरी घर से थोड़ी दूर किसी काम से निकली थी. आरोप है कि एक स्थानीय यूट्यूबर शिवबरन यादव और तत्कालीन भीमसेन चौकी प्रभारी दारोगा अमित मौर्या ने मिलकर उसे जबरन एक काली स्कॉर्पियो कार में अपहरण कर लिया. कार में लगभग दो घंटे तक बच्ची के साथ दरिंदगी की गई, जिसके बाद उसे बेहोश हालत में घर के पास छोड़ दिया गया. पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण के स्पष्ट संकेत मिले, जिसके आधार पर मुकदमे में गैंगरेप, अपहरण और POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं.
शिवबरन यादव को पुलिस ने जल्द ही गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मुख्य आरोपी दारोगा अमित मौर्या घटना के बाद से फरार चल रहा है. पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें गठित कीं, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर तक दबिश दी गई, मगर अब तक कोई सफलता नहीं मिली. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया है.
इस बीच घटना के अगले दिन यानी 6 जनवरी का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है जो पुलिस की कथित लापरवाही को बेनकाब करता दिखाई देता है. वीडियो में पीड़िता और उसका भाई भीमसेन चौकी के अंदर प्रवेश करते नजर आते हैं. उस समय वहां तत्कालीन चौकी प्रभारी दिनेश सिंह आरोपी दारोगा अमित मौर्या और पत्रकार शिवबरन मौजूद थे.
वीडियो में यह देखा जा सकता है कि आरोपी पत्रकार शिवबरन यादव पुलिस के सामने ही पीड़िता के भाई को गाली-गलौज करता और धमकाता है, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती. आरोपी दारोगा अमित मौर्या भी वहां मौजूद रहते हुए किसी से वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहता सुनाई देता है. यह दृश्य पुलिस की निष्क्रियता और संभावित पक्षपात को स्पष्ट रूप से उजागर करता है.
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. डीसीपी वेस्ट काशी मापड़ी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वीडियो उनके संज्ञान में आ चुका है और इसकी गहन जांच कराई जा रही है. जांच में यदि किसी की लापरवाही या गलत भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.