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ज्ञानवापी केस में बदला मुस्लिम पक्ष का रुख, सुप्रीम कोर्ट की पहल पर आज होगी अहम मध्यस्थता बैठक

ज्ञानवापी विवाद को मध्यस्थता और विशेष लोक अदालत के जरिए सुलझाने के सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव पर मंगलवार को वाराणसी में बैठक होगी. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों को मध्यस्थता केंद्र बुलाया है.

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Edited By: Reepu Kumari
ज्ञानवापी केस में बदला मुस्लिम पक्ष का रुख, सुप्रीम कोर्ट की पहल पर आज होगी अहम मध्यस्थता बैठक
Courtesy: Pinterest

Gyanvapi Dispute: वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद में मंगलवार का दिन अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस मामले से जुड़े पक्षकारों को कचहरी परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में बुलाया है. यहां विवाद के समाधान को लेकर विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के प्रस्ताव पर सुनवाई की जाएगी. हालांकि बैठक से पहले ही दोनों प्रमुख पक्ष इस प्रक्रिया पर अपनी असहमति जता चुके हैं.

ज्ञानवापी विवाद से संबंधित चार मामलों की सुनवाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राजीव मुकुल पांडेय की अध्यक्षता में होगी. इस बैठक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के अनुरूप आपसी सहमति से समाधान की संभावनाओं पर विचार करना है, लेकिन शुरुआती प्रतिक्रियाओं से सहमति बनती नहीं दिख रही है.

मंदिर पक्ष ने मध्यस्थता पर उठाए सवाल

मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने स्पष्ट कहा है कि वे मध्यस्थता के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि यह मामला विशेष लोक अदालत की परिधि में नहीं आता और इस तरह विवाद का समाधान संभव नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि मंदिर पक्ष अपने कानूनी रुख पर कायम रहेगा.

मुस्लिम पक्ष ने भी प्रस्ताव को ठुकराया

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी मध्यस्थता की प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी विवाद बेहद संवेदनशील है और इसे सामान्य विवादों की तरह नहीं देखा जा सकता. उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को देश के अन्य लंबित मामलों से अलग नहीं रखना चाहिए.

कई अदालतों में लंबित हैं मामले

ज्ञानवापी से जुड़े कुल 36 मामले वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं. इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाओं पर सुनवाई जारी है. सबसे पुराना मुकदमा वर्ष 1991 से लंबित है, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में नया मंदिर निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग की गई है.

चार मामलों पर होगी सुनवाई

मध्यस्थता केंद्र में मां शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन से जुड़े दो मामलों, व्यासपीठ के दिवंगत सोमनाथ व्यास के नाती शैलेंद्र पाठक द्वारा तलगृह में पूजा के अधिकार की मांग से जुड़े वाद समेत कुल चार मामलों पर सुनवाई की जाएगी. इन सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता प्रस्ताव के तहत सूचीबद्ध किया गया है.

विवाद का कानूनी आधार क्या है

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं. मंदिर पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर के नीचे आदि-विश्वेश्वर मंदिर के अवशेष मौजूद हैं और 1669 में औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कराया था. वहीं मस्जिद पक्ष इस भूमि को वक्फ संपत्ति बताता है और 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' का हवाला देता है. जिला अदालत के आदेश पर हुए एएसआई सर्वे में मंदिर से जुड़े अवशेष मिलने का दावा किया गया है, जबकि पूरा मामला अभी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है.