नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में साइबर फ्रॉड सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है. टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, ठग भी उतने ही चालाक तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. रोजाना हजारों लोग अनजान लिंक पर क्लिक करके, फर्जी मैसेज में दिए गए नंबर पर OTP शेयर करके या लालच में आकर अपना बैंक अकाउंट, पैसे और निजी जानकारी गंवा बैठते हैं.
साइबर ठग अब बैंक, सरकार, कंपनी या आपके अपने परिवार के सदस्य का नाम लेकर मैसेज भेजते हैं. एक छोटी सी गलती आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है. लेकिन अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी सावधानी और जानकारी से आप इन फ्रॉड से आसानी से बच सकते हैं. यहां हम आपको बताएंगे कि अनजान लिंक आने पर क्या जांच करनी चाहिए, भाषा पर कैसे ध्यान दें, डर और लालच से कैसे बचे और असली URL कैसे चेक करें.
कोई भी मैसेज बैंक, कंपनी, स्कूल या सरकारी विभाग के नाम से आए तो सबसे पहले भेजने वाले का ईमेल एड्रेस या नंबर चेक करें. असली संस्थानों का ईमेल आमतौर पर ऑफिशियल होता है. अगर एड्रेस थोड़ा भी अलग लगे तो समझ लें कि यह फर्जी हो सकता है.
साइबर ठग अब आपके दोस्त या रिश्तेदार का नाम इस्तेमाल करते हैं. अगर किसी जान-पहचान वाले की तरफ से अचानक संदिग्ध लिंक आए तो सीधे क्लिक न करें. पहले फोन करके पूछ लें कि उन्होंने सच में भेजा है या नहीं.
फर्जी मैसेज में अक्सर भाषा अजीब, गलत स्पेलिंग या मशीन जैसी लगती है. बैंक या सरकार के नाम से अगर ऐसा मैसेज आए तो उसे इग्नोर करें. असली मैसेज साफ और सही भाषा में होते हैं.
ठग अक्सर डराते हैं, “आपका अकाउंट बंद हो जाएगा”, “हैक हो गया है” या “आपको इनाम मिला है”. ऐसे मैसेज का मकसद आपको घबराकर या लालच में लिंक पर क्लिक करवाना होता है. शांत दिमाग से सोचें और कभी जल्दबाजी न करें.
कंप्यूटर या लैपटॉप पर माउस लिंक पर ले जाएं बिना क्लिक किए. असली वेबसाइट का पता (URL) दिख जाएगा. अगर पता अलग या अजीब हो तो बिल्कुल क्लिक न करें.
अनजान ऐप डाउनलोड न करें.
दो-स्टेप वेरिफिकेशन (OTP) हमेशा ऑन रखें.
संदिग्ध लिंक आने पर बैंक या कंपनी को सीधे फोन करके कन्फर्म करें.