लखनऊ: उत्तर प्रदेश में फिलहाल मॉनसून की चाल सुस्त पड़ गई है. मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश इलाकों में बारिश की गतिविधियां काफी सीमित रहेंगी. ऐसे में लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. इस दौरान केवल कुछ स्थानों पर हल्की या छिटपुट बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में प्रदेश पर कोई प्रभावी मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है. इसी वजह से नमी वाली हवाओं का असर कम हो गया है और तापमान में धीरे धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने के संकेत भी मिल रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मौसम फिर करवट ले सकता है.
मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन पूर्वी उत्तर प्रदेश पहुंचने के बाद कमजोर हो गया. इसके साथ ही मॉनसूनी द्रोणी भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर तराई क्षेत्र में खिसक गई है. इन बदलावों के कारण प्रदेश में नमी पहुंचाने वाली हवाओं की सक्रियता घट गई है. यही वजह है कि फिलहाल अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला धीमा पड़ गया है.
बारिश की कमी का असर अब तापमान पर भी दिखाई देने लगा है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में धीरे धीरे बढ़ोतरी हो सकती है. राजधानी लखनऊ में सोमवार को अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.8 डिग्री अधिक रहा. वहीं न्यूनतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम तंत्र बनने के संकेत मिल रहे हैं. यदि यह सिस्टम सक्रिय होता है तो प्रदेश में मॉनसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो सकती हैं. इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में कई इलाकों में बारिश का दौर दोबारा शुरू होने की संभावना है. फिलहाल लोगों को कुछ दिनों तक उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है.
नेपाल की बारिश से महराजगंज की नदियों में बढ़ा जलस्तर
प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश कम होने के बावजूद नेपाल में हो रही बारिश का असर महराजगंज जिले की नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है. महाव नाला खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रहा है. वहीं गंडक नदी का जल स्तर खतरे के निशान से करीब तीन मीटर नीचे है. चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ने लगी है.
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, महाव नाले का खतरे का स्तर पांच मीटर निर्धारित है, जबकि वर्तमान जलस्तर छह मीटर दर्ज किया गया है. गंडक नदी 109 मीटर पर बह रही है, जबकि इसका खतरे का स्तर 112 मीटर है. रोहिन, राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है. प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.