लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सालों बाद मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया गया है. राज्य में SIR की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट लिस्ट जारी की है. राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता के नाम दर्ज है. यह संख्या SIR शुरू होने से पहले की मतदाता संख्या से करीब 2 करोड़ 89 लाख कम है यानी लगभग 18 प्रतिशत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.
SIR से पहले उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे. अब नए पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है. इससे पहले वर्ष 2003 में आखिरी बार ऐसा गहन पुनरीक्षण किया गया था. उस समय के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं.
करीब 46 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है (लगभग 3%)
लगभग 79.5 लाख वोटर अपने दर्ज पते पर नहीं मिले (करीब 5%)
करीब 1 करोड़ 29 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं (लगभग 8.4%)
पहले से पंजीकृत मतदाता करीब 25 लाख हैं
अन्य कारणों से लगभग 7.7 लाख नाम हटे हैं
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी- 6 जनवरी
दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख- 6 फरवरी
आपत्तियों का निस्तारण- 7 से 27 फरवरी
फाइनल वोटर लिस्ट जारी- 6 मार्च
अगर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है या उसमें कोई गलती है, तो वह 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच शिकायत, दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है
11 जनवरी 2026 को सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी वोटर लिस्ट के नाम पढ़कर सुनाएंगे. पूरी सूची उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी.
18 साल पूरे होने पर पहली बार वोटर बनने के लिए फॉर्म 6 भरना होगा
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने या आपत्ति के लिए फॉर्म 7 भरना होगा
पता बदलने, नाम में सुधार, वोटर आईडी बदलने या दिव्यांग चिन्हित करने के लिए फॉर्म 8 भरना होगा
दूसरे राज्य से आकर यूपी में बसे लोग नाम जुड़वाने के लिए घोषणा पत्र भर सकते हैं
ऑनलाइन प्रकिया- voters.eci.gov.in या ECINET ऐप
ऑफलाइन प्रकिया- अपने बूथ लेवल अधिकारी के पास जाकर
voters.eci.gov.in वेबसाइट पर जाएं
राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और पोलिंग स्टेशन की जानकारी भरें
अपना नाम, अभिभावक का नाम और उम्र दर्ज करें
वोटर आईडी नंबर या सीरियल नंबर डालें
यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है. जिन लोगों को लापता या अज्ञात बताया गया है, उन्हें 2003 की पुरानी SIR सूची में नाम होने का प्रमाण या चुनाव आयोग द्वारा तय 12 दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा.
चुनाव आयोग का कहना है कि हर साल होने वाले छोटे सुधारों से पुरानी गलतियों को ठीक करना संभव नहीं था. पिछले 20 सालों में मतदाता सूचियों में कई तरह की गड़बड़ियां हो गई थी. जिनमें मृत लोगों के नाम, दूसरे राज्य या जिले में स्थायी रूप से चले गए वोटर और एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होना शामिल है.इन समस्याओं को दूर करने के लिए घर-घर जाकर बूथ स्तर पर जांच जरूरी थी, इसलिए SIR प्रक्रिया शुरू की गई.
SIR के दौरान करीब 1 करोड़ मतदाताओं की पहचान नहीं हो पाई है. ऐसे वोटर्स को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर द्वारा नोटिस भेजा जाएगा.
नोटिस मिलने पर मतदाताओं को आधार सहित चुनाव आयोग द्वारा तय 12 दस्तावेजों में से कोई एक समय पर जमा करना होगा. दस्तावेज सही पाए जाने पर उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा.