menu-icon
India Daily

MPPSC परीक्षा देने गई सिख महिला से पगड़ी उतारने को कहा तो भड़का सिख समाज, सेंटर पर हुआ जमा; माफी मांगने पर शांत हुआ मामला

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में MPPSC परीक्षा केंद्र पर एक अमृतधारी सिख महिला गुरलीन कौर से सुरक्षा जांच के नाम पर पगड़ी (दुमाला) उतारने को कहा गया. इस घटना से सिख समुदाय में रोष फैल गया और बड़ी संख्या में लोग केंद्र के बाहर जमा हो गए. काफी देर चली बातचीत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी मांगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
MPPSC परीक्षा देने गई सिख महिला से पगड़ी उतारने को कहा तो भड़का सिख समाज, सेंटर पर हुआ जमा; माफी मांगने पर शांत हुआ मामला
Courtesy: grok

रतलाम: रविवार को रतलाम के एक स्कूल में MPPSC की परीक्षा चल रही थी. इसी दौरान राजस्थान की रहने वाली अभ्यर्थी गुरलीन कौर, जो अमृतधारी सिख हैं, सुरक्षा जांच के लिए पहुंचीं. महिला स्टाफ ने उनसे दुमाला उतारने को कहा. यह बात जैसे ही सिख समुदाय तक पहुंची, लोग गुस्से में आ गए और केंद्र के बाहर इकट्ठा हो गए. समुदाय ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया. पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची. लंबी चर्चा के बाद उपखंड मजिस्ट्रेट और केंद्र अधीक्षक ने माफी मांगी. भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसका आश्वासन भी दिया गया.

पगड़ी उतारने की मांग से शुरू हुआ विवाद

गुरलीन कौर परीक्षा देने एक दिन पहले रतलाम पहुंची थीं और रिश्तेदारों के यहां ठहरी थीं. दोपहर में केंद्र पर पहुंचने पर महिला स्टाफ ने सुरक्षा के नाम पर उनकी पगड़ी उतारने को कहा. गुरलीन ने मना किया, लेकिन बात बढ़ गई. सिख समुदाय के लोगों को सूचना मिलते ही दर्जनों की संख्या में लोग केंद्र के बाहर जमा हो गए और कड़ी आपत्ति जताई. 

प्रशासन ने मांगी सार्वजनिक माफी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. सिख प्रतिनिधियों ने संबंधित कर्मी से माफी की मांग की. काफी देर तक चली बातचीत के बाद उपखंड मजिस्ट्रेट प्रतीक सोनकर और केंद्र अधीक्षक सुभाष कुमावत ने समुदाय के सामने खेद व्यक्त किया. उन्होंने घटना के लिए माफी मांगी और भविष्य में सावधानी बरतने का वादा किया. इसके बाद मामला शांत हो गया.

गुरलीन कौर कौन हैं?

गुरलीन कौर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की निवासी हैं. वे MPPSC परीक्षा के लिए रतलाम आई थीं. अमृतधारी होने के कारण वे सिख धर्म की मर्यादा का पूरी तरह पालन करती हैं. घटना के बाद उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी. प्रशासन ने मामले को सुलझाने में त्वरित कार्रवाई की, जिससे स्थिति नियंत्रण में आई.

सिख धर्म में पगड़ी का महत्व

सिख धर्म में पगड़ी केवल सिर ढकने का तरीका नहीं, बल्कि आस्था, सम्मान और पहचान का प्रतीक है. गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना के समय केश रखने का नियम दिया था. अमृतधारी सिखों के लिए पगड़ी उतारना धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक प्रतीकों को संरक्षण मिलता है.