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India Daily

ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश, सपा सांसद ने दिया रिएक्शन

पीड़ित पक्ष की ओर से कोर्ट को बताया गया कि घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर गोली चलाई थी, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया.

Anuj
Edited By: Anuj
ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश, सपा सांसद ने दिया रिएक्शन
Courtesy: Social Media

संभल: चंदौसी की एक अदालत ने संभल हिंसा से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने उस घटना में घायल हुए युवक आलम के मामले को गंभीर मानते हुए 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने के निर्देश दिए हैं. इन सभी पर यह आरोप है कि हिंसा के दौरान फायरिंग की गई, जिसमें आलम को गोली लगी थी. अदालत ने साफ कहा है कि सात दिन के भीतर इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए.

कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

इस केस में जिन पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें उस समय संभल के सीओ रहे अनुज चौधरी भी शामिल हैं. पीड़ित पक्ष की ओर से कोर्ट को बताया गया कि घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर गोली चलाई थी, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया.

पुलिसकर्मियों पर फायरिंग करने का आरोप

याचिका के मुताबिक, संभल में हुई हिंसा के दौरान 15 से 20 पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की थी. इसी दौरान आलम को तीन गोलियां लगी. घायल होने के बाद आलम को इलाज के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. उसके पिता ने इन सभी बातों का जिक्र करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने पूरे मामले को सुनने के बाद इसे जांच के योग्य मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया.

सपा सांसद की प्रतिक्रिया

इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है, न वर्दी, न ओहदा.  उनके मुताबिक, अदालत का यह आदेश दिखाता है कि अगर कोई अधिकारी भी कानून की सीमा पार करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

'परिवार के लिए इंसाफ की उम्मीद'

सांसद बर्क ने यह भी कहा कि संभल हिंसा के दौरान जिन अधिकारियों पर अधिकारों के गलत इस्तेमाल का आरोप है, उन्हें न्याय पालिका के जरिए जवाब देना पड़ेगा. उनका मानना है कि यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की उम्मीद लेकर आया है और इससे लोगों का भरोसा कानून व्यवस्था पर और मजबूत होगा.