लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. कोल इंडिया लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए संयुक्त उपक्रम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी का उद्देश्य प्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरतों को पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के जरिए पूरा करना है. साथ ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और हरित निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा.
समझौते के तहत एक नई संयुक्त उद्यम कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें कोल इंडिया की 51 प्रतिशत और यूपीआरवीयूएनएल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. यह कंपनी राज्य में विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की योजना, वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव का कार्य संभालेगी. दोनों संस्थाओं का लक्ष्य प्रदेश में आधुनिक और टिकाऊ ऊर्जा ढांचा विकसित करना है.
नई कंपनी ग्राउंड माउंटेड सोलर, फ्लोटिंग सोलर, रूफटॉप सोलर, पवन ऊर्जा और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं का विकास करेगी. आवश्यकता के अनुसार अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा. इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काम किया जाएगा.
कोल इंडिया की वित्तीय क्षमता और परियोजना क्रियान्वयन का अनुभव, यूपीआरवीयूएनएल की तकनीकी विशेषज्ञता और राज्य की ऊर्जा जरूरतों की समझ के साथ मिलकर काम करेगा. इस साझेदारी से बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है. इससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी.
दोनों संस्थाओं का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर हरित ऊर्जा निवेश को आकर्षित करेगी. साथ ही औद्योगिक विकास, रोजगार के अवसर और टिकाऊ आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी. कोल इंडिया स्वच्छ ऊर्जा निवेश के जरिए खुद को एकीकृत ऊर्जा कंपनी के रूप में विकसित कर रही है, जबकि यूपीआरवीयूएनएल हरित ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है.
समझौते के दौरान यूपीआरवीयूएनएल के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी और कोल इंडिया के निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट) आशीष कुमार मौजूद रहे. कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं और इन्वेस्ट यूपी के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. सभी ने इस साझेदारी को उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया.