लखनऊ: लखनऊ में भीख मांगने पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. जिसके लिए शहर में अब सात टास्क फोर्स टीमें हैं जो 'भिखारी-मुक्त' लखनऊ अभियान के तहत 19 प्रमुख चौराहों पर नजर रखेंगी.
ये टीमें जिला प्रशासन ने महिला कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग, नगर निगम और DUDA यानी जिला शहरी विकास एजेंसी के सहयोग से बनाई हैं. वे भीख मांगते पाए गए लोगों जैसे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की काउंसलिंग करते हैं, उन्हें इस काम से रोकते हैं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उन्हें सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ते हैं.
चल रहे इस अभियान के तहत शनिवार को महिला कल्याण विभाग, गुडंबा पुलिस स्टेशन और नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम ने टेढ़ी पुलिया पुल के नीचे अस्थायी रूप से बसे लोगों को हटाया. पुल के नीचे का इलाका साफ कर दिया गया ताकि वे आसपास के इलाकों में भीख न मांग सकें.
जिलाधिकारी विशाख जी ने कहा, 'हम लखनऊ को भीख मांगने से मुक्त शहर बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं. हमने यह सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित टीम तैयार की है कि भीख मांगने के कोई जबरदस्ती के मामले न हों.'
इसके साथ ही जिला प्रशासन ने बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई के तहत कई तरीकों को अपनाने का फैसला किया है. फोकस बच्चों को स्कूल भेजने और उनके माता-पिता को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आय के वैकल्पिक स्रोत खोजने में मदद करने पर होगा.
प्रशासन ने अक्टूबर में घोषणा की थी कि वह शहर के सभी फ्लाईओवरों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए मिलकर प्रयास करेगा.
एक अधिकारी ने कहा, 'जिले में कई फ्लाईओवर हैं जो ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए पिछले कुछ सालों में बनाए गए हैं. दुर्भाग्य से फ्लाईओवरों के नीचे की जगह पर अतिक्रमण हो गया है और कुछ मामलों में बस्तियां बस गई हैं. हम जमीन के उन बड़े हिस्सों को वापस लेना चाहते हैं और उन्हें दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं.'